July 25, 2026

राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

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नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि सहित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है, क्योंकि यह मामला करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है।

राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।

उन्होंने कहा कि अयोध्या स्थित रामलला का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस प्रकार के किसी भी विवाद का निष्पक्ष समाधान आवश्यक है। उनका कहना था कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके और तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएं।

महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में ड्राफ्टिंग कमेटी गठित किए जाने के निर्णय पर भी मनीष तिवारी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख किया गया है, न कि कॉमन सिविल कोड का। उनके अनुसार दोनों अवधारणाओं को एक समान मानना उचित नहीं है और इस विषय पर संवैधानिक प्रावधानों को सही संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

तिवारी ने यह भी कहा कि पहले जब इस विषय पर चर्चा हुई थी, तब यह स्पष्ट किया गया था कि कुछ विशेष समुदायों और अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का विचार सामने आया था। उनका तर्क था कि यदि विभिन्न समुदायों के पारंपरिक और प्रथागत कानूनों को अलग रखा जाता है तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता कहना कठिन होगा। उन्होंने इस विषय पर व्यापक संवाद और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सिंधु जल संधि और पाकिस्तान के साथ संबंधों पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में कांग्रेस सांसद ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर देश की नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति मौजूद है और इस दिशा में सरकार को प्रभावी ढंग से अपनी नीति लागू करनी चाहिए।

तिवारी ने कहा कि आतंकवाद और सामान्य संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते। उनके अनुसार भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं तथा सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के विरुद्ध सख्त रुख बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर देश के भीतर व्यापक सहमति बनी हुई है और सरकार को उसी भावना के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।

राम मंदिर विवाद, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर दिए गए मनीष तिवारी के बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब ये तीनों विषय राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं। उनके बयान को विपक्ष के दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जबकि इन मुद्दों पर आगे भी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

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