March 8, 2026

उमर और मुजम्मिल की तुर्की में हुई थी जैश हैंडलर्स के साथ मुलाकात, पाकिस्तान से मिलते रहे निर्देश

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Govt said atanki sajish

– Delhi car explosion case: 26/11 जैसा हमला करने की थी तैयारी

– लाल किले के पास धमाके के लिए हाई ग्रेड मिलिट्री विस्फोटक के इस्तेमाल की आशंका
– पुष्टि हुई तो इस वारदात में पाकिस्तानी सेना की संलिप्तता से नहीं किया जा सकेगा इन्कार
– दस माह पहले भी उमर नबी ने साथी के संग मिलकर की थी लाल किले की रेकी
– 26 जनवरी को लाल किले व दीपावली पर प्रमुख बाजारों में धमाका करने की थी साजिश

लाल किले के बाहर आइ-20 कार में हुए धमाके में हाई ग्रेड मिलिट्री विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ था। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि धमाके की तीव्रता और उससे हुए नुकसान से साफ है कि यह अमोनियम नाइट्रेट जैसे साधारण विस्फोटक से संभव नहीं है, जिन्हें आतंकियों के फरीदाबाद के ठिकाने से बरामद किया गया था। वहीं, आतंकी उमर और मुजम्मिल के तुर्किये जाने और वहां जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स के भी सुबूत मिल रहे हैं। जांच में सामने आया है कि इस माड्यूल का हैंडलर पाकिस्तान से इन्हें निर्देश दे रहा था। साफ है कि लाल किले के पास धमाका भले ही हताशा में किया गया हो, लेकिन लंबी तैयारी यह थी कि 26/11 की तरह कई स्थानों पर एक साथ हमले करके दिल्ली को दहलाया जाए। 26 नवंबर, 2008 को पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते आए आतंकियों ने मुंबई में एक साथ कई स्थानों पर हमले कर देश की आर्थिक राजधानी को दहला दिया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हाई ग्रेड मिलिट्री विस्फोटक की पुष्टि होने की स्थिति में इसके पीछे पाकिस्तानी सेना की संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता। अगर इसकी पुष्टि होती है तो इस घटना की प्रतिक्रिया का रूप भी अलग हो सकता है।

फोरेंसिक जांच से खुलेगा विस्फोटक का राज

धमाके वाली क्षतिग्रस्त कार के सभी पार्ट्स को मंगलवार देर रात ट्रक में डालकर जांच के लिए रोहिणी स्थित फोरेंसिक साइंस लैब में ले जाया गया। वहां एफएसएल, सीबीआइ और एनआइए की फोरेंसिक टीमें कार से नमूने उठाकर जांच कर रही हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि धमाके के बाद वाहनों में लगी आग को बुझाने के लिए अग्निशमन कर्मियों को पानी का इस्तेमाल करना पड़ा। इससे विस्फोटक में इस्तेमाल केमिकल धुल गए। इसी कारण तीन दिन बाद भी विस्फोटक के बारे में निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा जा सका है। धमाके में क्षतिग्रस्त अन्य सभी वाहनों के अलावा आसपास की जमीन व अन्य जगहों से नमूने उठाने और जांच करने का काम किया जा रहा है। मौके से करीब 200 से अधिक नमूने उठाए गए हैं जिनकी लैब में जांच की जा रही है। मौके पर भी फोरेंसिक वैन में नमूने की जांच की जा रही है।

इंडिया गेट व कांस्टीट्यूशन क्लब आदि थे निशाने पर

जांच से पता चला कि जैश आतंकियों ने एनसीआर के शहरों में भारी तबाही मचाने की बड़ी साजिश रची थी। इनकी साजिश बीते 26 जनवरी को लाल किले व दीपावली के दौरान प्रमुख बाजारों में सीरियल धमाके करने की थी, लेकिन तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण इन्होंने अंतिम समय में अपने टारगेट रद कर दिए थे। पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि इनकी योजना इंडिया गेट, कांस्टीट्यूशन क्लब व गौरी शंकर मंदिर, सरोजनी नगर मार्केट, लाजपत नगर मार्केट व सदर बाजार आदि स्थानों पर सीरियल ब्लास्ट करने की थी। ये लोग किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम दे पाते इससे पहले पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा से लेकर एनसीआर तक में आतंकियों की धरपकड़ शुरू कर दी। तब हताशा में डा. उमर नबी ने सोमवार शाम लाल किले के बाहर आत्मघाती हमला कर दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बीते जनवरी के पहले हफ्ते में डा. उमर नबी ने अपने साथी डा. मुजम्मिल के साथ मिलकर लाल किले की रेकी की थी। उसके बाद उन्होंने 26 जनवरी को वहां धमाका करने की योजना बनाई थी। डा. मुजम्मिल से पूछताछ के बाद उसके व डा. उमर के मोबाइल फोन के लाल किले के पास डंप डाटा उठाने से इसकी जानकारी मिली है।

छह दिसंबर को विस्फोट की थी तैयारी

समाचार एजेंसी प्रेट्र ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि उमर नबी ने छह दिसंबर को बाबरी ढांचा विध्वंस की बरसी के आसपास एक शक्तिशाली विस्फोट की योजना बनाई थी। गिरफ्तार किए गए आठ लोगों से पूछताछ और उनके परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों से बातचीत के बाद उसकी योजना का ब्योरा मिला है। फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले मुजम्मिल अहमद गनी उर्फ मुसैब की गिरफ्तारी से उसकी योजना नाकाम हो गई थी। अधिकारियों ने दावा किया कि गनी के साथ 2021 में तुर्किये की यात्रा ने उमर के अंदर नाटकीय बदलाव और कट्टरता पैदा की थी। यात्रा के बाद उमर ने कथित तौर पर गनी के साथ अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर सहित विस्फोटक इकट्ठा करना शुरू कर दिया और उन्हें अल फलाह परिसर में व उसके आसपास जमा करना शुरू कर दिया था। वह इंटरनेट पर उपलब्ध स्रोतों से वाहन-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस के निर्माण और विस्फोट सर्किट के बारे में जानकारी लेने के बाद उसे असेंबल कर रहा था।

एनआइए ने 10 सदस्यीय विशेष टीम बनाई

समाचार एजेंसी आइएएनएस के अनुसार, एनआइए ने लाल किले के पास हुए कार विस्फोट की जांच के लिए 10 अधिकारियों की एक विशेष टीम का गठन किया है। 10 सदस्यीय इस विशेष टीम का नेतृत्व एनआइए के एडीजी विजय सखारे करेंगे। इसमें एक आइजी, दो डीआइजी, तीन एसपी और बाकी डीएसपी स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। एनआइए जैश माड्यूल की संलिप्तता की व्यापक जांच के लिए फरीदाबाद के धौज स्थित अल-फलाह मेडिकल कालेज का दौरा भी कर सकती है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को इस वारदात की जांच एनआइए को सौंप दी थी। दिल्ली पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसियां 1,000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही हैं। उन्हें संदेह है कि कार विस्फोट एक आत्मघाती हमला हो सकता है।

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