काले रंग और मोटे शरीर को लेकर पत्नी के ताने का आरोप तलाक मांगने पहुंचे पति को हाई कोर्ट से झटका
मामला जांजगीर चांपा जिले के 28 वर्षीय अक्ष घोष और रायगढ़ जिले की 25 वर्षीय पूजा सीत से जुड़ा है। दोनों की शादी 7 मार्च 2019 को रायगढ़ जिले के एक गांव में हुई थी। शादी के बाद पत्नी करीब दो से तीन महीने तक पति और उसके परिवार के साथ रही। पति का आरोप था कि इस दौरान पत्नी का व्यवहार उसके प्रति शत्रुतापूर्ण रहा। उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और अक्सर अपने मायके चली जाती थी। पति के मुताबिक पत्नी उसकी अनुमति के बिना एक रिश्तेदार की शादी में राजस्थान गई और करीब 25 दिन बाद वापस लौटी। इसी दौरान उसने जुड़वां बच्चों के गर्भपात का भी जिक्र किया।
दूसरी तरफ पत्नी ने पति के आरोपों से इनकार किया। महिला ने अपने पति पर दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाया। उसका कहना था कि इस जानकारी के बाद पति ने शराब पीना शुरू कर दिया था। महिला ने पति पर दुर्व्यवहार करने और गर्भावस्था के दौरान उचित इलाज नहीं कराने का भी आरोप लगाया। उसके अनुसार बीमार होने पर उसकी मां उसे रायगढ़ के अस्पताल लेकर गई थी। ठीक होने के बाद उसने पति और उसके परिवार से उसे वापस ले जाने का अनुरोध किया लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद महिला की मां ने 24 फरवरी 2020 को रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। महिला ने घरेलू हिंसा कानून के तहत भी पति और उसके परिवार के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में कार्रवाई शुरू की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से रखे गए आरोपों और उपलब्ध सबूतों की जांच की। अदालत ने पाया कि पति अपनी पत्नी की ओर से की गई कथित क्रूरता और परित्याग के आरोपों को ठोस सबूतों से साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति ने कई आरोप लगाए लेकिन उन्हें प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं रखे गए। पत्नी द्वारा पति को काले रंग या मोटे शरीर वाला बताने का आरोप भी अपने आप में तलाक देने का पर्याप्त आधार नहीं माना गया।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि पति यह साबित करने में असफल रहा कि पत्नी बिना उचित कारण अपने माता पिता के साथ रह रही थी। इसके साथ ही वह यह भी साबित नहीं कर सका कि पत्नी ने वैवाहिक संबंध खत्म करने की मंशा से उसे छोड़ दिया था। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना और पति की अपील खारिज कर दी। फैमिली कोर्ट ने जहां पति की तलाक याचिका खारिज की थी वहीं पत्नी की ओर से दायर स्त्रीधन वापस करने की याचिका को मंजूर किया था। हाई कोर्ट ने बिना किसी लागत के अपील खारिज करते हुए डिक्री तैयार करने का निर्देश दिया।
