June 7, 2026

केंद्र सरकार की पहल से राजौरी के युवाओं की बदली किस्मत: पोल्ट्री फार्म से 50-60 हजार की मासिक कमाई

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नई दिल्ली । जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में केंद्र सरकार की प्रायोजित योजनाओं का सकारात्मक असर अब साफ नजर आने लगा है। युवा बेरोजगार और किसान अब स्थिर आय के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ मुर्गी पालन को एक आकर्षक विकल्प मान रहे हैं।

तांडवाल-मुबारकपुरा क्षेत्र के निवासी एहतेशाम ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से एक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया। इस उद्यम के माध्यम से अब उनकी मासिक आय लगभग 50,000 से 60,000 रुपये तक पहुंच गई है।

एहतेशाम के फार्म ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए। इस पहल से स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाएँ किस प्रकार जमीनी स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद कर सकती हैं।

राजौरी के मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. खालिद ने बताया कि मुर्गी पालन जिले में आजीविका का एक संभावित और लाभदायक विकल्प बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि लाभार्थियों को उद्यम स्थापित करने और उसका विस्तार करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्राप्त हो।

डॉ. खालिद के अनुसार, विशेष रूप से शिक्षित बेरोजगार युवा इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। ये युवा अपने घरों के पास स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं और पोल्ट्री फार्म उनके लिए स्थिर आय का स्रोत बन गया है। विभाग लगातार नए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहा है और उन्हें व्यवसाय में स्थायित्व और सफलता दिलाने के लिए सभी संभव साधन प्रदान कर रहा है।

एहतेशाम ने बताया कि उनके पिता को इस योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने इसका आवेदन किया। पशुपालन विभाग ने उन्हें मुर्गियों के बच्चों के साथ प्रशिक्षण और लोन उपलब्ध कराए। पहले परिवार के लिए जीवन बहुत कठिन था और घर चलाने के लिए अक्सर कर्ज लेना पड़ता था।

अब फार्म शुरू होने के बाद एहतेशाम की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनका मासिक आय स्तर 50,000 से 60,000 रुपये तक है और उन्होंने पांच स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है। यह स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक स्पष्ट उदाहरण है।

राजौरी जिले में केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग की योजनाओं ने दिखा दिया है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण के साथ छोटे स्तर के व्यवसाय भी लाभदायक और टिकाऊ बन सकते हैं। इस सफलता ने स्थानीय युवाओं और किसानों में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी जगाई है।

यह कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाएँ केवल लाभार्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके माध्यम से व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी उत्पन्न होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और स्थानीय रोजगार सृजन करना इन योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य हैं।

राजौरी के उदाहरण ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार और विभागीय सहयोग के माध्यम से छोटे उद्यमी भी बड़े आर्थिक बदलाव ला सकते हैं। मुर्गी पालन का यह मॉडल अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवाओं और बेरोजगारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

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