October 22, 2026

अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

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नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी एंगल को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई अभिनेत्री उर्मिला सनावर का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती है। इसके लिए अदालत में आवेदन दिया गया है और अब उनकी सहमति की पुष्टि के लिए उन्हें 23 अक्टूबर को देहरादून की अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मामले में कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की जांच में कोई नई जानकारी सामने आएगी। हालांकि अभी किसी नए खुलासे की पुष्टि नहीं हुई है और जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी ने 21 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया था। मंगलवार देर शाम सीबीआई की टीम सहारनपुर स्थित उर्मिला सनावर के घर पहुंची और उन्हें अदालत में पेश होने का नोटिस सौंपा। उन्हें 23 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अदालत में उपस्थित होना है। इस दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि वह पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी इच्छा से सहमति दे रही हैं या नहीं।

सीबीआई की ओर से इन परीक्षणों की मांग ऐसे समय की गई है जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। उर्मिला सनावर से जुड़े कथित ऑडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। इन ऑडियो के माध्यम से कुछ दावे किए गए थे जिनकी सत्यता और मामले से संबंधित पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी व्यक्ति का नाम कथित आरोपों में सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन जरूरी है।

सीबीआई इस मामले में पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अदालत से अनुमति चाहती है। पॉलीग्राफ परीक्षण के दौरान व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को दर्ज किया जाता है जबकि नार्को परीक्षण में विशेष दवाओं के प्रभाव में पूछताछ की जाती है। इन दोनों प्रक्रियाओं की अपनी सीमाएं हैं और इनके नतीजों को अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। इसलिए जांच एजेंसी को अन्य साक्ष्यों और तथ्यों के साथ इनका मूल्यांकन करना होगा।

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि किसी भी परीक्षण के लिए सहमति स्वतंत्र और स्वैच्छिक होनी चाहिए। अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि उर्मिला सनावर की सहमति किसी दबाव धमकी लालच या अनुचित प्रभाव के कारण न हो। रिपोर्ट के अनुसार वह पहले ही परीक्षण कराने के लिए सहमति देने की बात कह चुकी हैं। अब अदालत में उनकी इच्छा की औपचारिक पुष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से उत्तराखंड में संवेदनशील और चर्चित मामला रहा है। कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठते सवालों के कारण इस प्रकरण पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस होती रही है। सीबीआई की जांच और उर्मिला सनावर के प्रस्तावित परीक्षण को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन परीक्षणों से किसी कथित वीआईपी का नाम सामने आएगा या मामले में कोई नया मोड़ आएगा। अब सभी की नजर अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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