September 5, 2026

जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच बंगाल में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ा, सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया

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नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के कई जिलों में घरों के भीतर आयोजित होने वाली ईसाई प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रार्थना सभाओं पर कथित हमले, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद ईसाई समूहों ने कुछ इलाकों में ऐसी बैठकें और लोगों से नियमित मुलाकात का सिलसिला फिलहाल रोक दिया है। दूसरी ओर, कुछ संगठनों ने इन गतिविधियों के दौरान जबरन धर्मांतरण किए जाने के आरोप लगाए हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक प्रार्थना निजी आस्था का विषय है, लेकिन जबरन धर्मांतरण की पुष्टि होने पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

हावड़ा जिले के उलूबेरिया में 23 अगस्त को एक किराए के मकान में रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान विवाद की शुरुआत हुई। वहां करीब 60 पुरुष और महिलाएं मौजूद थे। पादरी मिथुन हाजरा के अनुसार, दोपहर करीब तीन बजे नारे लगाती हुई भीड़ मकान में पहुंची और वहां मौजूद लोगों पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया। इसके बाद कथित तौर पर मारपीट और तोड़फोड़ हुई।

हाजरा ने आरोप लगाया कि उनके साथ भी मारपीट की गई। प्रार्थना स्थल पर रखा साउंड सिस्टम, पोडियम, मेज, कुर्सियां और पंखे क्षतिग्रस्त कर दिए गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पादरी और अन्य लोगों को वहां से सुरक्षित निकाला तथा उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद शिकायत दर्ज कराई गई। हावड़ा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने प्राथमिकी दर्ज होने और जांच जारी रहने की पुष्टि की है। इस मामले में उस समय तक किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी।

ईसाई संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उलूबेरिया की घटना अकेली नहीं है। उनके अनुसार, 30 अगस्त को हावड़ा के जगतबल्लवपुर और उत्तर 24 परगना के हिंगलगंज में भी घरों में चल रही प्रार्थना सभाओं के दौरान विवाद की घटनाएं सामने आईं। 25 अगस्त को हावड़ा के घुसुड़ी में आयोजित प्रार्थना सभा में कथित मारपीट की शिकायत सामने आई, जबकि 26 अगस्त को पूर्व मेदिनीपुर के चेक माइलपोस्ट गांव में पादरी और उनकी पत्नी के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया गया।

पूर्व बर्धमान जिले के सहानगर में 14 अगस्त को अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद हुआ। चर्च के प्रभारी पादरी सैमुअल हेम्ब्रम के अनुसार, कुछ लोगों ने दफन स्थल से संबंधित दस्तावेज मांगे और अंतिम संस्कार रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दफनाए जाने के बाद शव को कब्र से बाहर निकाल दिया गया और बाद में दूसरे कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार करना पड़ा।

पूर्व बर्धमान की पुलिस अधीक्षक पुष्पा ने बताया कि मृत महिला स्थानीय निवासी नहीं थी और स्थानीय लोगों ने दफन स्थल को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका दावा था कि संबंधित जमीन निजी है और कब्रिस्तान नहीं है। पुलिस जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है। शोक मनाने आए लोगों के साथ मारपीट के आरोप की भी स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।

हिंदू संगठन सिंघा वाहिनी के अध्यक्ष देबदत्त माझी ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पैसे का लालच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। वहीं राज्य के आदिवासी विकास और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा कि प्रार्थना करना व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में जबरन धर्मांतरण साबित होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की बात कही। टीएमसी प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी ने भाजपा पर डर की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा के राज्यसभा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि उन्हें इन घटनाओं की जानकारी नहीं है और उन्होंने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

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