कांग्रेस छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री तय? सियासत में हलचल तेज
अखिलेश यादव करा सकते हैं सदस्यता
सूत्रों के अनुसार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी की सदस्यता दिला सकते हैं। बताया जा रहा है कि उनके साथ कुछ पूर्व विधायक और क्षेत्रीय नेता भी सपा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में यह केवल एक व्यक्ति का दल बदल नहीं, बल्कि एक छोटे राजनीतिक समूह का पुनर्संयोजन भी हो सकता है।
कांग्रेस से अलग होने के बाद सिद्दीकी के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज थीं। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन अब सपा में संभावित एंट्री की खबरों ने यूपी की राजनीतिक फिजा बदल दी है।
बसपा से कांग्रेस और अब सपा की ओर
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे कभी बहुजन समाज पार्टी का बड़ा चेहरा रहे और पार्टी प्रमुख मायावती के करीबी सहयोगी माने जाते थे। 2017 में बसपा से निष्कासन के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था।
हालांकि कांग्रेस में उनकी पारी लंबी नहीं चली। 24 जनवरी को उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले ने कांग्रेस संगठन में भी हलचल मचा दी थी। अब सपा में संभावित शामिल होने की चर्चा ने इसे और ज्यादा सियासी रंग दे दिया है।
इस्तीफे के पीछे क्या वजह?
सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ते समय संकेत दिए थे कि वह पार्टी की कार्यप्रणाली और अंदरूनी माहौल से संतुष्ट नहीं थे। चर्चा यह भी रही कि उन्हें अपेक्षित सम्मान और भूमिका नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में उनका असंतोष धीरे-धीरे सार्वजनिक फैसले में बदल गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम अहम साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक और पारंपरिक समीकरणों को लेकर दलों की रणनीति पहले से ही तेज है। ऐसे में सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता का सपा के साथ जाना विपक्षी राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।
बदलते सियासी समीकरण
यूपी की राजनीति में दल-बदल नई बात नहीं है, लेकिन चुनाव से पहले बड़े चेहरों की हलचल हमेशा संकेत देती है कि जमीन पर तैयारी शुरू हो चुकी है। यदि 15 फरवरी को सिद्दीकी की सपा में औपचारिक एंट्री होती है, तो यह आने वाले महीनों में और राजनीतिक पुनर्संयोजन का रास्ता खोल सकती है।
