पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय पर प्रशासन की कार्रवाई, सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर
जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार संबंधित भवन को अवैध निर्माण की श्रेणी में पाया गया था। प्रशासन का कहना है कि भवन स्वामी और संबंधित पक्ष को पहले नोटिस जारी कर निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज या संतोषजनक जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का निर्णय लिया गया। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।
शनिवार सुबह जैसे ही बुलडोजर कार्यालय परिसर पहुंचे, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र होने लगे। कुछ ही देर में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर पहुंच गए, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासनिक कार्रवाई में सहयोग करने की अपील की।
जानकारी के अनुसार यह कार्यालय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से बंद पड़ा था। इससे पहले डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र से जुड़े कई संगठनात्मक कार्यक्रम, बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन इसी कार्यालय से किया जाता था। स्थानीय स्तर पर यह भवन तृणमूल कांग्रेस की महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है।
इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन जहां इसे अवैध निर्माण के विरुद्ध सामान्य कानूनी कार्रवाई बता रहा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना जताई जा रही है। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल प्रशासन की निगरानी में भवन को ध्वस्त करने का कार्य जारी है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी गई है। संबंधित पक्ष की ओर से इस कार्रवाई पर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
