इंडोनेशिया में भारत की कूटनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन, 20 अहम समझौतों के साथ रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिली नई दिशा
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने इस सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान बताते हुए इंडोनेशिया की सरकार और वहां की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक संबंध समय के साथ और अधिक मजबूत हुए हैं तथा भविष्य में यह साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।
द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग सबसे प्रमुख विषय रहा। दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ, जिसे भारत के रक्षा निर्यात और स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और सामरिक समन्वय को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग और आपसी विश्वास को नई मजबूती मिलेगी।
बैठक के दौरान चुनाव प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली में सहयोग, कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी साझेदारी तथा क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश जैसे विषयों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। दोनों देशों ने विज्ञान, नवाचार और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे आर्थिक संबंधों के साथ-साथ तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया मिलकर दुनिया में मानवता को नई ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत विस्तारवाद नहीं बल्कि विकासवाद की नीति में विश्वास रखता है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों की समुद्री निकटता का उल्लेख करते हुए कहा कि भौगोलिक दूरी भले अधिक दिखाई देती हो, लेकिन समुद्र दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास का मजबूत सेतु है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों, शांति और साझा विकास को दोनों देशों की साझेदारी का आधार बताया।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया का संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों की जनता, संस्कृति, इतिहास और सभ्यताओं के बीच गहरे जुड़ाव पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का समाधान सहयोग, संवाद और परस्पर सम्मान के माध्यम से तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को रेखांकित किया।
यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी जकार्ता में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत की विकास यात्रा, वैश्विक भूमिका और प्रवासी भारतीयों के योगदान पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, आर्थिक संबंधों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखी जा रही है।
