June 30, 2026

शहरी रोजगार रिपोर्ट: देश के 46 बड़े शहरों में सात साल में तेजी से घटी बेरोजगारी दर, महिलाओं की स्थिति में भी बड़ा सुधार

0
2-1782809277
नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों में रोजगार के मोर्चे पर एक राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 46 प्रमुख शहरों में पिछले सात वर्षों के दौरान बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 से 2025 के बीच इन शहरों की कुल बेरोजगारी दर 7.9 फीसदी से घटकर अब महज 4.9 फीसदी के स्तर पर आ गई है। यह बदलाव दर्शाते हैं कि देश के बड़े महानगरीय और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

इस रिपोर्ट में महिला और पुरुष दोनों ही श्रेणियों में बेरोजगारी दर में निरंतर आ रही कमी का विशेष उल्लेख किया गया है। पुरुषों की बात करें तो उनकी बेरोजगारी दर जो साल 2017-18 में 7.5 प्रतिशत थी, वह लगातार गिरते हुए वर्ष 2025 में 4.5 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। इसी तरह महिलाओं के मामले में भी काफी बड़ा सुधार देखने को मिला है। साल 2018-19 में महिला बेरोजगारी दर बढ़कर 10.4 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई और साल 2025 में यह घटकर 6.1 प्रतिशत रह गई। यह आंकड़े कामकाजी महिलाओं के लिए शहरी क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों को रेखांकित करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इन 46 शहरों में रोजगार की सामान्य स्थिति 4.9 प्रतिशत रही, जबकि वर्तमान साप्ताहिक स्थिति के आधार पर यह 6.8 प्रतिशत दर्ज की गई। यह आंकड़े लगभग पूरे शहरी भारत के औसत के समान ही हैं, जहां क्रमशः यह दर 4.8 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत रही है। एक खास बात यह भी सामने आई है कि इन बड़े शहरों में काम करने वाले पुरुष और महिला श्रमिक पूरे देश के अन्य शहरी इलाकों के मुकाबले औसतन अधिक घंटे काम कर रहे हैं। इसके अलावा, 15 से 29 वर्ष के ऐसे युवाओं का अनुपात जो किसी भी प्रकार के रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण का हिस्सा नहीं हैं, इन शहरों में 22.2 फीसदी रहा, जो पूरे शहरी भारत के औसत (25.0 फीसदी) से काफी बेहतर है।

मंत्रालय की रिपोर्ट में श्रम बल से बाहर रहने के मुख्य कारणों का भी विश्लेषण किया गया है। पुरुषों के मामले में 53.5 प्रतिशत ने श्रम बल से बाहर रहने की मुख्य वजह अपनी पढ़ाई जारी रखना बताया। वहीं, महिलाओं के मामले में 68.7 प्रतिशत ने बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों को रोजगार न करने या उससे बाहर रहने का प्राथमिक कारण बताया। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते देश में शहर आर्थिक गतिविधियों, नवाचार और रोजगार सृजन के मुख्य केंद्र बन चुके हैं, इसलिए इनकी आर्थिक संरचना को समझना बेहद जरूरी है।

इसके साथ ही, इन 46 बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की औसत आय देश के अन्य शहरी हिस्सों की तुलना में काफी बेहतर पाई गई है। आंकड़ों के मुताबिक, स्वरोजगार से जुड़े लोगों की पिछले 30 दिनों की औसत आय 30,858 रुपये रही, जबकि नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारियों की औसत आय 28,808 रुपये दर्ज की गई। दिहाड़ी या आकस्मिक श्रमिकों की बात करें तो वे रोजाना औसतन 624 रुपये कमा रहे हैं। इसके विपरीत, पूरे शहरी भारत में स्वरोजगार की औसत आय 23,013 रुपये, नियमित वेतनभोगियों की 26,258 रुपये और दिहाड़ी मजदूरों की कमाई 550 रुपये प्रतिदिन रही।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *