September 6, 2026

सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

0
26-1788695306
नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह उतार चढ़ाव वाला और सतर्क कारोबार का रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी के महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों पर रहेगी।

पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त दर्ज की। शुक्रवार को सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 के स्तर पर पहुंचा। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 24,000 का स्तर पार किया, लेकिन अंतिम चरण में इसकी ज्यादातर बढ़त कम हो गई।

तकनीकी संकेतों के लिहाज से सेंसेक्स के लिए 77,000 से 77,500 का क्षेत्र शुरुआती रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसके ऊपर 77,700 से 78,000 का दायरा महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है। यदि सूचकांक 78,000 के ऊपर मजबूती से टिकने में कामयाब रहता है तो बाजार में तेजी का नया दौर देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में सेंसेक्स 78,500 से 78,800 की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर सकता है।

हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में सेंसेक्स अभी सुधार और समेकन के दौर में दिखाई दे रहा है। यदि ऊपरी स्तरों पर खरीदारी का समर्थन कमजोर रहता है तो मुनाफावसूली बढ़ सकती है। इससे सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है और निवेशकों को हर तेजी के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिके रहना बाजार की मजबूती के लिए अहम होगा। यदि निफ्टी लगातार 23,800 के नीचे बंद होता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और सूचकांक 23,600 के आसपास पहुंच सकता है। इसके विपरीत ऊपर की ओर 24,000 से 24,200 का क्षेत्र प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक निफ्टी 24,000 से 24,200 के दायरे को निर्णायक रूप से पार नहीं करता, तब तक बाजार में पूरी तरह मजबूत तेजी की पुष्टि नहीं मानी जा सकती। इस दौरान निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली कर सकते हैं और कारोबार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

बाजार की धारणा पर कच्चे तेल की कीमतों का असर भी महत्वपूर्ण रहेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच जारी टकराव से ऊर्जा बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की बाधा की आशंका कच्चे तेल की कीमतों को और प्रभावित कर सकती है। ऊंची तेल कीमतें भारत के लिए महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है और बड़ी गिरावट को सीमित करने में मदद कर रही है। आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों के संकेत और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी रहेगी।

यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार आता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी होती है तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है। इसके विपरीत नकारात्मक वैश्विक संकेतों से निफ्टी के 23,800 और सेंसेक्स के 76,000 के आसपास के स्तरों की मजबूती की परीक्षा हो सकती है। ऐसे में अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में तकनीकी स्तरों के साथ वैश्विक घटनाक्रम की भूमिका अहम रहने की संभावना है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *