महंगाई और जमाखोरी पर लगाम की तैयारी: त्योहारों से पहले चीनी स्टॉक की सीमा घटाई, कीमतों को काबू में रखने की बड़ी कवायद
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब आने वाले महीनों में देशभर में त्योहारों का दौर शुरू होने वाला है और चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। मांग बढ़ने के साथ जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका भी पैदा होती है जिससे आम उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार का मानना है कि स्टॉक की सीमा कम करने से बाजार में चीनी की लगातार आवाजाही बनी रहेगी और बड़े पैमाने पर माल जमा कर कृत्रिम कमी पैदा करने की संभावना कम होगी। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चीनी की उपलब्धता के रूप में मिल सकता है।
हालांकि सरकार ने देश के सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसी सीमा लागू नहीं की है। कोलकाता और उसके आसपास के महानगरीय इलाकों के लिए चीनी स्टॉक की सीमा 4 हजार क्विंटल ही रखी गई है। इसके पीछे उस क्षेत्र की विशेष बाजार और आपूर्ति जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। कोलकाता उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से चीनी मंगाकर पूर्वी भारत और उत्तर पूर्वी राज्यों तक इसकी आपूर्ति करता है। ऐसे में वहां स्टॉक सीमा कम करने से सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका हो सकती थी। सरकार ने इसी कारण कोलकाता क्षेत्र को नई सीमा से अलग रखते हुए पुरानी व्यवस्था जारी रखने का फैसला किया है।
केंद्र सरकार ने केवल नियम बदलने तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी है बल्कि देशभर में चीनी मिलों डीलरों और व्यापारियों के पास मौजूद स्टॉक की सघन निगरानी और भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने जानकारी छिपाने और चीनी की बिक्री व आवाजाही में होने वाली अनियमितताओं का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों और बाजार में चीनी की बेहतर उपलब्धता का असर कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में एक्स मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है जबकि खुदरा बाजार में भी कीमतों में कमी का रुझान दिखने लगा है।
आने वाले हफ्तों में सरकार की निगरानी और तेज रहने वाली है। चीनी मिलों व्यापारियों और डीलरों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन लगातार जारी रखा जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था तय सीमा से अधिक चीनी जमा कर बाजार की स्थिति को प्रभावित न कर सके। त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग के बीच सरकार की यह रणनीति उपभोक्ताओं को राहत देने और बाजार में कीमतों को स्थिर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि स्टॉक सीमा में कटौती और लगातार निगरानी का असर खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों को कितना नियंत्रित कर पाता है।
