बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती
जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान एक विशेष बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में पहले ही कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं लेकिन सीमा शुल्क व्यवस्था में अभी और बदलाव की जरूरत है। सरकार का फोकस भारतीय बंदरगाहों से आयात होने वाले सामान की आवाजाही को तेज और आसान बनाने पर है ताकि कारोबारियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और देश के प्रमुख बंदरगाहों पर भीड़ कम हो सके।
सरकार जिस नई व्यवस्था पर विचार कर रही है उसमें आधुनिक स्कैनर और रिस्क आधारित आयात स्क्रीनिंग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत ज्यादा जोखिम वाले आयात की गहन जांच की जाएगी जबकि कम जोखिम वाले कंसाइनमेंट को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इस व्यवस्था से सीमा शुल्क अधिकारियों को संदिग्ध और संवेदनशील मामलों पर अधिक ध्यान देने में मदद मिलेगी जबकि सामान्य व्यापारिक गतिविधियां बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ सकेंगी। इसका सीधा फायदा आयातकों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को भी मिल सकता है।
सरकार का यह कदम कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेज कस्टम क्लियरेंस से बंदरगाहों पर माल के लंबे समय तक रुके रहने की समस्या कम हो सकती है। इससे व्यापार की लागत घटने और कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ने की संभावना है। हालांकि वित्त मंत्री ने स्कैनर आधारित प्रणाली और ऑटोमैटिक मंजूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमा शुल्क क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम जारी है।
दूसरी ओर सरकार बैंकिंग सेक्टर को भी विकसित भारत 2047 की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है जो भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका और दिशा पर विचार करेगी। यह समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी जिसके आधार पर बैंकिंग क्षेत्र में आगे की रणनीति तय की जा सकती है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था को निवेश बढ़ाने, उद्योगों को वित्त उपलब्ध कराने और देश की विकास यात्रा को गति देने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमों के अनुपालन का बोझ कम करने पर लगातार काम कर रही है। अब तक एक हजार से अधिक पुराने कानून हटाए जा चुके हैं और लगभग 40 हजार नियमों को सरल बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य नागरिकों और कंपनियों को जटिल प्रक्रियाओं से राहत देना और निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार करना है।
ये प्रस्तावित सुधार ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। ऐसे में सरकार का नया सुधार एजेंडा स्पष्ट संकेत देता है कि तेज कारोबार आधुनिक सीमा शुल्क प्रणाली मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और सरल नियमों के जरिए भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
