September 11, 2026

11 सितंबर को शेयर बाजार में फिर मचेगा घमासान! कच्चे तेल की तेजी के बीच Sensex-Nifty पर क्या रहेगा दबाव

0
9-27-1773057256

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए 11 सितंबर का कारोबारी सत्र काफी अहम रहने वाला है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है और निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। 10 सितंबर को कारोबार के दौरान बाजार में काफी हलचल रही और दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 0.19 फीसदी की बढ़त के साथ 74902.59 अंक पर बंद हुआ जबकि निफ्टी में करीब 0.2 फीसदी की तेजी दर्ज हुई। हालांकि बाजार की यह मामूली रिकवरी निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं करती है।

बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर देश के आयात बिल महंगाई रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि शुक्रवार के कारोबार में तेल की कीमतों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

विदेशी निवेशकों का रुख भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक इस कमजोरी के बीच बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो बाजार में उतार चढ़ाव और बढ़ सकता है।

ग्लोबल मार्केट के संकेत भी शुक्रवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अमेरिकी बाजारों में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की नजर है। अमेरिका में महंगाई से जुड़े आंकड़े फेडरल रिजर्व की अगली नीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।

घरेलू बाजार में निवेशकों को खासतौर पर बैंकिंग आईटी ऑटो एफएमसीजी और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर नजर रखनी चाहिए। कच्चे तेल की तेजी से तेल आयात पर निर्भर कंपनियों की लागत प्रभावित हो सकती है जबकि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कुछ शेयरों को इसका अलग असर मिल सकता है। दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण ब्याज दरों और उपभोक्ता मांग से जुड़े क्षेत्रों पर भी बाजार की नजर रह सकती है।

तकनीकी स्तर पर भी शुक्रवार का कारोबार महत्वपूर्ण होगा। हाल के सत्रों में निफ्टी में कमजोरी देखी गई है और बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी हो सकता है।

कुल मिलाकर 11 सितंबर को शेयर बाजार की चाल कई बड़े संकेतों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतें मध्य पूर्व का तनाव विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अमेरिकी बाजार और रुपये की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में शुक्रवार को बाजार में तेज उतार चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों को किसी भी शेयर में फैसला लेने से पहले कंपनी की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। यह खबर निवेश की सलाह नहीं है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *