June 4, 2026

थिंकटेक इंडिया पर धोखाधड़ी के आरोपों का साया: CEO गिरफ्तार, 700 से अधिक कर्मचारियों का भविष्य अधर में

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नई दिल्ली । पुणे के प्रमुख आईटी केंद्र हिंजेवाड़ी में संचालित थिंकटेक इंडिया से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कंपनी के अचानक संचालन बंद कर देने और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद 700 से अधिक कर्मचारी और इंटर्न गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से वंचित कर दिया गया, जबकि उनके वेतन, स्टाइपेंड और कंपनी के पास जमा सुरक्षा राशि अब भी फंसी हुई है।

मामला उस समय सामने आया जब एक इंटर्न ने कंपनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में वित्तीय अनियमितताओं, भुगतान रोकने और कर्मचारियों से धन लेने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी की गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच के दौरान कई अन्य कर्मचारियों और इंटर्न ने भी समान शिकायतें दर्ज कराईं, जिससे मामला और व्यापक हो गया।

जांच के क्रम में पुलिस ने कंपनी के सीईओ हर्षल ठाकरे को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी कथित वित्तीय घोटाले और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों के आधार पर की गई है। पुलिस अब कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और कारोबारी गतिविधियों की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कर्मचारियों के साथ हुए कथित वित्तीय नुकसान के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने अप्रैल महीने में अचानक अपना संचालन बंद कर दिया। कई कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि दफ्तर बंद है और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों या प्रबंधन से संपर्क संभव नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति ने कर्मचारियों के सामने न केवल रोजगार का संकट खड़ा कर दिया, बल्कि उनकी आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू कर्मचारियों और इंटर्न से ली गई सुरक्षा जमा राशि को लेकर भी है। कर्मचारियों का दावा है कि कंपनी ने आधिकारिक लैपटॉप और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने के नाम पर प्रत्येक कर्मचारी से लगभग 15 हजार रुपये जमा कराए थे। अब कंपनी के संचालन बंद होने के बाद यह राशि वापस नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि कंपनी शुरुआती दौर में समय पर वेतन और स्टाइपेंड का भुगतान करती थी, जिससे कर्मचारियों का भरोसा बना रहा। हालांकि, इस वर्ष जनवरी से भुगतान में अनियमितता शुरू हुई और बाद में वेतन पूरी तरह रुक गया। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि बकाया भुगतान के लिए कंपनी ने उन्हें चेक जारी किए, लेकिन इनमें से अनेक चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गए। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।

जांच एजेंसियों ने इस मामले में कंपनी के ट्रेनिंग एवं डेवलपमेंट विभाग के प्रमुख तथा एक एचआर प्रबंधक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और संबंधित दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।

यह मामला देश के आईटी क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों और नए रोजगार तलाश रहे युवाओं के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। फिलहाल प्रभावित कर्मचारी अपने बकाया भुगतान और जमा राशि की वापसी की उम्मीद में जांच प्रक्रिया के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जबकि पुलिस वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है।

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