August 4, 2026

सेबी के नए सीएएस सिस्टम से बढ़ी उलझन, बीएसई और एनएसई पर एक ही शेयर के क्लोजिंग भाव में बड़ा अंतर

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नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बाजार बंद होने के बाद शेयरों के अंतिम भाव को लेकर नई स्थिति सामने आई है। बाजार नियामक द्वारा लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) सिस्टम के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कई प्रमुख कंपनियों के शेयर अलग-अलग क्लोजिंग प्राइस पर बंद हुए। इससे निवेशकों, ट्रेडर्स और बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि एक ही समय पर कारोबार समाप्त होने के बावजूद दोनों एक्सचेंजों पर अंतिम भाव में इतना अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।

मंगलवार के कारोबारी सत्र में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में यह अंतर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। ट्रेंट का शेयर बीएसई पर बढ़त के साथ 3,070 रुपये पर बंद हुआ, जबकि एनएसई पर इसका क्लोजिंग भाव 3,107.70 रुपये दर्ज किया गया। इसी तरह भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के शेयर में भी दोनों एक्सचेंजों पर अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिला। बीएसई पर यह बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई पर हल्की गिरावट दर्ज की गई।

बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी दोनों एक्सचेंजों के क्लोजिंग प्राइस में उल्लेखनीय अंतर दिखाई दिया। बीएसई पर शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई पर इसमें गिरावट दर्ज की गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, टाइटन, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट सहित कई अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी इसी तरह का अंतर देखने को मिला। इससे यह स्पष्ट हुआ कि नया सिस्टम लागू होने के बाद दोनों एक्सचेंजों की क्लोजिंग प्रक्रिया अलग-अलग परिणाम दे रही है।

कारोबार की शुरुआत से ही दोनों प्रमुख सूचकांकों की चाल में भी अंतर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में जहां सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला, वहीं निफ्टी कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार बंद होने पर भी दोनों सूचकांकों के प्रदर्शन में अंतर बना रहा। सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी में अपेक्षाकृत अधिक कमजोरी दर्ज की गई। दोनों सूचकांकों की क्लोजिंग के बीच प्रतिशत के आधार पर भी अंतर देखा गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीएएस प्रणाली का उद्देश्य बाजार बंद होने के समय अंतिम कीमतों की खोज को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। हालांकि शुरुआती चरण में दोनों एक्सचेंजों पर उपलब्ध ऑर्डर, मांग और आपूर्ति के अलग-अलग स्वरूप के कारण अंतिम क्लोजिंग प्राइस में अंतर देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को यह समझना होगा कि दोनों एक्सचेंज स्वतंत्र रूप से अपने-अपने क्लोजिंग ऑक्शन के आधार पर अंतिम मूल्य निर्धारित करते हैं।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि नए सिस्टम को पूरी तरह स्थिर होने में कुछ समय लग सकता है। शुरुआती दिनों में निवेशकों के लिए यह बदलाव नया अनुभव है, इसलिए भ्रम की स्थिति स्वाभाविक मानी जा रही है। यदि भविष्य में भी यह अंतर लगातार बना रहता है तो बाजार सहभागियों को अपनी निवेश और ट्रेडिंग रणनीतियों में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं।

फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी निवेश निर्णय से पहले संबंधित एक्सचेंज पर दर्ज आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस और बाजार के समग्र रुझान का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें। नए सिस्टम के प्रभाव का वास्तविक आकलन आने वाले कारोबारी सत्रों में अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की संभावना है।

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