April 23, 2026

सागरमाला का बड़ा असर! पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में रिकॉर्ड विकास

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नई दिल्ली। देश के समुद्री क्षेत्र में पिछले एक दशक में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है और इसमें सागरमाला प्रोग्राम की अहम भूमिका रही है। बंदरगाहों के आधुनिकीकरण से लेकर जलमार्गों के विकास तक, इस महत्वाकांक्षी योजना ने भारत की लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

845 परियोजनाएं शुरू, 315 पूरी

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ‘सागरमाला’ के तहत अब तक करीब 845 परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 6.06 लाख करोड़ रुपए है। इनमें से 1.57 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली 315 परियोजनाएं 24 मार्च 2026 तक पूरी हो चुकी हैं।
इसके अलावा 210 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि 320 परियोजनाएं अभी योजना चरण में हैं।

‘सागरमाला 2.0’ से निवेश को मिलेगा बड़ा बूस्ट

सरकार अब सागरमाला 2.0 के जरिए इस पहल को और आगे बढ़ा रही है। इसके तहत 85,482 करोड़ रुपए के निवेश से लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए के कुल निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे देश में पोर्ट-आधारित औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

कार्गो हैंडलिंग और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार

‘सागरमाला’ के प्रभाव से भारत के प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में बंदरगाहों ने 915.17 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जो तय लक्ष्य से अधिक है और सालाना आधार पर 7.06% की वृद्धि दर्शाता है।

साथ ही, जहाजों का औसत टर्नअराउंड टाइम 2014 के 96 घंटे से घटकर 2025 में 49.5 घंटे रह गया है। इससे माल ढुलाई की गति बढ़ी है और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है।

वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई भारत की स्थिति

भारतीय बंदरगाहों की वैश्विक रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। देश के 9 बंदरगाह अब दुनिया के टॉप-100 बंदरगाहों में शामिल हो चुके हैं।
विशाखापत्तनम बंदरगाह कंटेनर ट्रैफिक के मामले में दुनिया के शीर्ष 20 बंदरगाहों में अपनी जगह बना चुका है, जो भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है।

जलमार्गों से बढ़ी माल ढुलाई, 700% की छलांग

अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिए कार्गो परिवहन में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। यह 2013-14 के 18.10 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.50 मिलियन टन हो गया है, यानी करीब 700% की बढ़ोतरी। इससे देश का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल और विविधतापूर्ण बन गया है।

 मछुआरों और रोजगार पर सकारात्मक असर

‘सागरमाला’ के तहत 1,057 करोड़ रुपए की लागत से 11 फिशिंग हार्बर परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिससे 30,000 से ज्यादा मछुआरों को सीधा लाभ मिला है।
इसके अलावा, कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए तटीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका भी बेहतर हुई है। सरकार का अनुमान है कि इस कार्यक्रम से लगभग 1 करोड़ रोजगार सृजित होंगे, जिनमें 40 लाख प्रत्यक्ष और 60 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां शामिल हैं।

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