June 3, 2026

अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बावजूद कीमती धातुओं में गिरावट, MCX पर चांदी 1,300 रुपए तक फिसली

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नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कीमती धातुओं के बाजार में बुधवार को कमजोरी का रुख देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता जरूर बढ़ाई है, लेकिन इसका सीधा फायदा सोने और चांदी को नहीं मिल सका। इसके विपरीत घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में दोनों धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बन गया है।

सोने की कीमतों में शुरुआत में मामूली मजबूती देखी गई, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें दबाव बढ़ता गया। अगस्त डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हल्की बढ़त के साथ खुला, लेकिन जल्द ही इसमें गिरावट दर्ज की गई और यह नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई बढ़ने की आशंका ने ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना को मजबूत किया है, जिससे सोने में निवेश की मांग सीमित हो गई है।

चांदी के बाजार में अधिक अस्थिरता देखने को मिली। जुलाई वायदा चांदी की कीमतों में करीब 1,300 रुपए प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार में कमजोर धारणा को दर्शाती है। कारोबार के दौरान चांदी ने शुरुआती स्तर पर स्थिरता दिखाई, लेकिन बाद में बिकवाली दबाव बढ़ने से यह नीचे आ गई। विश्लेषकों का कहना है कि चांदी की चाल फिलहाल सीमित दायरे में बनी हुई है, लेकिन वैश्विक संकेतों के कारण इसमें तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में कमजोरी का रुख देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड और फ्यूचर्स दोनों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतें भी दबाव में रहीं। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने वैश्विक महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है, लेकिन इसके बावजूद निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर अपेक्षित रूप से आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक संकेतों में अनिश्चितता और ब्याज दरों की दिशा को लेकर असमंजस माना जा रहा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है, अन्यथा दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में सतर्कता बनाए रखना ही बेहतर रणनीति मानी जा रही है क्योंकि किसी भी दिशा में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।

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