September 14, 2026

प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

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नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने परिवार के साथ मुंबई के ऐतिहासिक चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति के दर्शन किए। दोनों ने गणपति की पूजा-अर्चना कर उत्सव में भाग लिया।

प्रणव अदाणी अदाणी एंटरप्राइजेज में एग्रो, ऑयल एंड गैस कारोबार के प्रबंध निदेशक और निदेशक भी हैं। उन्होंने चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि चिंचपोकली चा चिंतामणि की समृद्ध विरासत भक्ति, एकता और मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रही है। यह उत्सव इस वर्ष अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

चिंचपोकली चा चिंतामणि को मुंबई के दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणपति उत्सव के रूप में माना जाता है। इसकी परंपरा शहर के पुराने कपड़ा मिल क्षेत्रों परेल, गिरगांव और लालबाग से जुड़ी रही है। शुरुआती दौर में कपड़ा मिलों के श्रमिकों ने इस उत्सव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इस सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस पहल से भी जुड़ी मानी जाती है, जिसके तहत 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को घरों तक सीमित धार्मिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप दिया गया था।

इस वर्ष चिंचपोकली चा चिंतामणि का आयोजन दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला से प्रेरित विशेष थीम पर किया गया है। गणेश प्रतिमा को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की शैली में सजाया गया है। प्रतिमा की सजावट में गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को शामिल किया गया है।

उत्सव के लिए तैयार किए गए भव्य पंडाल की वास्तुकला हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर, स्वर्णगिरि की शैली से प्रेरित है। पंडाल में ऊंचे गोपुरम, दीप स्तंभ और याली तथा व्याल जैसे संरक्षक शिल्प बनाए गए हैं, जो इसकी विशेष थीम का हिस्सा हैं।

चिंचपोकली चा चिंतामणि की परंपरा ने मुंबई में हुए बड़े सामाजिक और औद्योगिक बदलावों के दौर को भी देखा है। वर्ष 1982 की ऐतिहासिक बॉम्बे कपड़ा मिल हड़ताल और उसके बाद शहर में हुए बदलावों के बावजूद यह उत्सव अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

करीब 5,000 योगदानकर्ताओं के सहयोग से संचालित चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल की गतिविधियां केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं हैं। मंडल की ओर से स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं।

वर्ष 1939 से चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से के पास गणेशोत्सव का आयोजन लगातार किया जा रहा है। चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल ही इन वर्षों में इस आयोजन का संचालन करता रहा है। गणेशोत्सव के अलावा मंडल रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यक्रम और बच्चों के लिए विभिन्न कल्याणकारी पहल भी आयोजित करता है।

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