March 8, 2026

फार्मा सेक्टर को बूस्ट! FY28 तक भारत का API बाजार 5-7% बढ़ने का अनुमान

0
i7t-1772441064

नई दिल्ली। भारतीय एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट (API) उद्योग को लेकर ताजा रिपोर्ट में सकारात्मक तस्वीर उभरकर सामने आई है। रेटिंग एजेंसी CARE Ratings के अनुसार, वर्तमान में 15-16 अरब डॉलर के आकार वाला भारत का एपीआई बाजार वित्त वर्ष 27 और 28 तक 5-7 प्रतिशत की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ सकता है। यह वृद्धि सरकारी प्रोत्साहन, संरचनात्मक बदलाव और बढ़ती घरेलू व वैश्विक मांग के दम पर संभव मानी जा रही है।

बेसिक से कॉम्प्लेक्स एपीआई की ओर बढ़ता कदम
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय फार्मा कंपनियां अब कम मार्जिन वाले बेसिक एपीआई से हटकर जटिल और हाई-पोटेंसी एपीआई की ओर रुख कर रही हैं। इसका मकसद है-कीमतों में गिरावट के दबाव को कम करना, मुनाफा बढ़ाना और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत करना। विनियमित बाजारों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारतीय कंपनियों की पैठ लगातार गहरी हो रही है, जिससे निर्यात अवसर भी बढ़ रहे हैं।

चीन पर निर्भरता चिंता, लेकिन सुधार के संकेत


रिपोर्ट में प्रमुख कच्चे माल के लिए चीन पर आयात निर्भरता को अभी भी जोखिम माना गया है। हालांकि सरकार की उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (PLI) योजना और बल्क ड्रग पार्क पहल से हालात में सुधार के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार 30 से अधिक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और कई कंपनियों ने नई उत्पादन क्षमताएं शुरू कर दी हैं।

बल्क ड्रग पार्क से बदलेगा परिदृश्य

सरकार समर्थित बल्क ड्रग पार्क परियोजनाएं एपीआई निवेश के अगले चरण को दिशा दे रही हैं। आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में 20 से 40 अरब रुपये की लागत वाली बड़ी सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। करीब 80 प्रतिशत चल रही परियोजनाएं इसी पहल से जुड़ी बताई गई हैं।

दीर्घकालीन मांग के मजबूत आधार

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले वर्षों में उम्रदराज आबादी की बढ़ती संख्या, स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच, बीमा कवरेज का विस्तार और पुरानी बीमारियों में वृद्धि से दवाओं की मांग बढ़ेगी। इसके अलावा पेटेंट समाप्ति और उभरते बाजारों में विस्तार भी भारतीय एपीआई उद्योग के लिए अवसर पैदा करेगा।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जटिल एपीआई परियोजनाओं का पूर्ण व्यावसायीकरण होने और बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने में अभी 2–4 वर्ष लग सकते हैं। लेकिन संकेत साफ हैं भारतीय एपीआई उद्योग धीरे-धीरे वैल्यू चेन में ऊपर की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *