ईरान-US जंग का तेल पर असर: 170 में से 145 देशों में बढ़े पेट्रोल के दाम, भारत में भी महंगा
म्यांमार में 56%, भूटान में 55% तक बढ़े दाम
GlobalPetrolPrices के आंकड़ों के अनुसार म्यांमार में पेट्रोल की कीमत 56%, भूटान में 55% और क्यूबा में 51% बढ़ी। UAE में करीब 50% और नाइजीरिया में 48% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अमेरिका में भी पेट्रोल महंगा हुआ है। यहां औसत कीमत 2.94 डॉलर से बढ़कर 4.09 डॉलर प्रति गैलन हो गई, यानी करीब 39% की वृद्धि। इसका सीधा असर वाहन चलाने की लागत पर पड़ा है।
भारत में करीब 8% बढ़ी कीमत
मध्य पूर्व में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत में भी देखने को मिला। दिल्ली में फरवरी के मुकाबले पेट्रोल और डीजल की कीमत करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर बढ़ी। हालांकि, जहां कई देशों में पेट्रोल 40-50% तक महंगा हुआ, वहीं भारत में बढ़ोतरी करीब 8% रही। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक तेल महंगा रहने का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
सिर्फ पेट्रोल नहीं, हर सेक्टर पर असर
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता। खेती, फैक्ट्रियों, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन की लागत बढ़ने से सामान की कीमतों पर भी दबाव आता है। तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल फूड पैकेजिंग, प्लास्टिक बोतल, मेडिकल सिरिंज, पॉलिएस्टर, नायलॉन, कॉस्मेटिक्स, डिटर्जेंट और पेंट समेत कई उत्पादों में होता है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी लागत को प्रभावित कर सकती है।
भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल, माल ढुलाई, खाद, पैकेजिंग और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। यानी जंग भले ही पश्चिम एशिया में हो रही हो, लेकिन उसकी आर्थिक आंच दुनिया के दूसरे हिस्सों और भारत के घरेलू बाजार तक भी पहुंच सकती है।
