October 20, 2026

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू, भारतीय निर्यात को 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच और किसानों को नए अवसर

0
10-1792482567

नई दिल्ली ।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इसका लाभ विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), किसानों, महिलाओं, युवाओं और श्रम-प्रधान उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। समझौते में व्यापार के अवसर बढ़ाने के साथ भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच से भारतीय कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार, इस समझौते से पेशेवरों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे और भारत के मूलभूत हित सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने इसे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया।

कृषि क्षेत्र को लेकर मंत्री ने कहा कि भारतीय किसानों को फल, सब्जियां, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड में बाजार के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय मजबूत करने और उनकी आजीविका बेहतर बनाने के लिए आपसी सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते में पूरी तरह संरक्षण दिया गया है। इससे व्यापार विस्तार के साथ किसानों के हितों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है।

भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी इस समझौते को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र के पुणे में निर्मित जेसीबी मशीन की न्यूजीलैंड को पहली खेप के निर्यात को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में निर्मित भारतीय मशीनों का इस्तेमाल बढ़ना देश के विनिर्माण उद्योग के लिए नए अवसरों का संकेत है। इससे भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौते केवल आयात-निर्यात शुल्क घटाने तक सीमित नहीं होते। ये व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं के बेहतर एकीकरण के माध्यम से दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों से नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया आसान होती है और दोनों देशों के बीच कारोबार करना अधिक सुविधाजनक बनता है।

सरकार का अनुमान है कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अतिरिक्त, यह समझौता कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप सहित विभिन्न क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश का रास्ता खोल सकता है। इससे कारोबारी सहयोग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सेवा क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाओं, निर्माण, पर्यटन और दृश्य-श्रव्य सेवाओं से जुड़ी भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में अवसर मिलेंगे। इन क्षेत्रों में बाजार तक पहुंच बढ़ने से भारतीय सेवा प्रदाताओं को अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।

दवा और चिकित्सा उपकरण उद्योग के लिए भी समझौते में महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। न्यूजीलैंड अब वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त नियामकों की ओर से जारी निरीक्षण मंजूरियों को स्वीकार करेगा। इससे भारतीय फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस निर्यातकों के लिए नियामकीय अनुपालन का बोझ कम हो सकता है और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। कुल मिलाकर, इस समझौते का उद्देश्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, निवेश और पेशेवर सहयोग को व्यापक बनाना है, जबकि भारत के संवेदनशील क्षेत्रों के हितों को सुरक्षित रखना भी इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *