October 11, 2026

सोना-चांदी के आयात पर IGST छूट खत्म, क्या अब बढ़ेंगे दाम? जानिए खरीदारों पर कितना होगा असर

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नई दिल्ली। सोना, चांदी और प्लैटिनम खरीदने वालों के लिए कीमती धातुओं के आयात से जुड़े टैक्स नियमों में बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने बैंकों और अधिकृत एजेंसियों को आयात के समय मिलने वाली अग्रिम IGST छूट समाप्त कर दी है। अब कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3% इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) का भुगतान करना होगा। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, बैंक 1 अप्रैल 2026 से ही इस टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इस बदलाव की जानकारी दी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बाजार में सोना-चांदी सीधे 3% महंगा हो जाएगा। कीमतों पर वास्तविक असर आयात लागत और कारोबारियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

पहले क्या था नियम, अब क्या बदला?

साल 2017 में सरकार ने सोने के आयात पर बैंकों को अग्रिम IGST भुगतान से छूट दी थी। बाद में इस सुविधा का दायरा बढ़ाकर अन्य कीमती धातुओं को भी इसमें शामिल किया गया। इसके तहत बैंक और अधिकृत एजेंसियां आयात के समय IGST का अग्रिम भुगतान किए बिना सोना, चांदी और प्लैटिनम मंगा सकती थीं।

अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। इसके बाद आयात करने वाले बैंकों और संबंधित एजेंसियों को कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3% IGST का भुगतान करना होगा। यानी आयात के वक्त ही टैक्स चुकाने के लिए पर्याप्त रकम की व्यवस्था करनी पड़ेगी।

राजस्व सचिव के अनुसार, बैंक 1 अप्रैल 2026 से इस व्यवस्था के तहत टैक्स चुका रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इसकी जानकारी दी।

सरकार ने क्यों खत्म की टैक्स छूट?

सरकार के इस कदम का उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों से होने वाले कीमती धातुओं के आयात में टैक्स व्यवस्था को समान बनाना है। पहले बैंकों के माध्यम से आयात करने वालों को अग्रिम टैक्स भुगतान के मामले में विशेष सुविधा मिलती थी। अब इस अंतर को समाप्त करने की कोशिश की गई है।

गुजरात की GIFT सिटी स्थित इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) जैसे संगठित प्लेटफॉर्म भी कीमती धातुओं के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार चाहती है कि टैक्स नियमों के कारण किसी एक आयात माध्यम को अनुचित लाभ न मिले और सभी माध्यमों के लिए व्यवस्था अधिक समान हो।

बैंकों और आयातकों पर क्या पड़ेगा असर?

इस बदलाव का सबसे प्रत्यक्ष असर बैंकों और आयातकों की नकदी व्यवस्था पर पड़ सकता है। पहले अग्रिम IGST भुगतान से मिलने वाली राहत के कारण आयात के समय उतनी रकम की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती थी। अब टैक्स का भुगतान कस्टम्स क्लीयरेंस के दौरान करना होगा।

हालांकि, पात्र कारोबारियों को लागू नियमों के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से चुकाए गए टैक्स का लाभ मिल सकता है। लेकिन टैक्स पहले जमा करना होगा और उसका समायोजन बाद में हो सकता है। इससे कारोबारियों की कुछ रकम अस्थायी रूप से फंस सकती है।

बड़े पैमाने पर सोना-चांदी आयात करने वाले बैंकों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। यदि इसके लिए उन्हें अतिरिक्त फंड जुटाना पड़ता है, तो उनकी वित्तीय लागत भी बढ़ सकती है। इस लागत का कितना हिस्सा आगे ग्राहकों तक पहुंचेगा, यह कारोबारियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।

क्या ग्राहकों को सोना-चांदी 3% महंगा मिलेगा?

नहीं, केवल अग्रिम IGST छूट खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि सोना-चांदी की खुदरा कीमत सीधे 3% बढ़ जाएगी। यह बदलाव आयात के समय टैक्स भुगतान की व्यवस्था से जुड़ा है। अंतिम कीमत कई दूसरे कारकों से भी तय होती है।

सोने-चांदी के दाम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात पर लागू अन्य शुल्कों और घरेलू मांग का असर पड़ता है। यदि आयातकों की लागत या वित्तीय खर्च बढ़ता है, तो उसका कुछ हिस्सा बाजार की कीमतों में शामिल किया जा सकता है। लेकिन यह अपने आप में तय नहीं है कि पूरी अतिरिक्त लागत ग्राहकों से ही वसूली जाएगी।

इसलिए खरीदारों को कीमतों में संभावित बदलाव का आकलन करते समय केवल इस टैक्स संबंधी फैसले को आधार नहीं बनाना चाहिए।

त्योहार और शादी के सीजन में क्यों अहम है बदलाव?

भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह के दौरान सोने-चांदी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत में होने वाला बदलाव घरेलू बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

कीमती धातुओं का आयात देश के विदेशी मुद्रा खर्च और व्यापार घाटे से भी जुड़ा है। ऐसे में सरकार की ओर से आयात के अलग-अलग माध्यमों पर समान टैक्स व्यवस्था लागू करने का कदम कारोबारियों की लागत और बाजार की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है।

आम खरीदार क्या ध्यान रखें?

सोना या चांदी खरीदने से पहले ग्राहक इन बातों पर ध्यान दें:

बाजार भाव: खरीदारी के दिन सोने या चांदी का ताजा भाव जांचें।
मेकिंग चार्ज: आभूषणों पर लगने वाले मेकिंग चार्ज की जानकारी लें।
लागू टैक्स: बिल में दर्ज टैक्स और अन्य शुल्कों की जांच करें।
अंतिम कीमत: केवल 3% IGST से जुड़ी खबर के आधार पर कीमतों में समान अनुपात में बढ़ोतरी मानकर न चलें।

कुल मिलाकर, अग्रिम IGST छूट समाप्त होने से बैंकों और आयातकों की नकदी जरूरत बढ़ सकती है, लेकिन आम खरीदारों के लिए सोना-चांदी कितना महंगा होगा, यह बाजार की परिस्थितियों और कारोबारियों की प्रतिक्रिया से तय होगा।

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