September 14, 2026

आईटी, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं का दम, मई में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ तेज, रोजगार सृजन में भी बढ़ोतरी

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नई दिल्ली । भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत और उत्साह देने वाली खबर सामने आई है। देश के सेवा क्षेत्र ने मई 2026 में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है। मजबूत मांग, नए ग्राहकों की बढ़ती संख्या और विभिन्न क्षेत्रों में कारोबारी गतिविधियों के विस्तार ने सर्विस सेक्टर को नई ऊर्जा प्रदान की है। ताजा आर्थिक संकेतकों से स्पष्ट है कि भारत का सेवा क्षेत्र घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर बढ़ती मांग का लाभ उठा रहा है।

मई के दौरान सर्विसेज पीएमआई 59.8 के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले महीने के मुकाबले अधिक है और नवंबर के बाद का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। आर्थिक गतिविधियों को मापने वाले इस सूचकांक में 50 से ऊपर का स्तर विस्तार का संकेत देता है। ऐसे में 59.8 का आंकड़ा यह दर्शाता है कि सेवा क्षेत्र में विकास की गति लगातार मजबूत बनी हुई है और कारोबार में सकारात्मक माहौल कायम है।

विशेषज्ञों के अनुसार माल ढुलाई, डिजिटल सेवाएं, ई-कॉमर्स, सूचना प्रौद्योगिकी और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने इस वृद्धि को प्रमुख रूप से समर्थन दिया है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग का असर भी सेवा क्षेत्र की गतिविधियों पर साफ दिखाई दिया। कंपनियों को नए ग्राहकों और नए प्रोजेक्ट्स से लगातार ऑर्डर प्राप्त हुए, जिससे कारोबारी विश्वास को मजबूती मिली।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी भारतीय सेवा क्षेत्र को सकारात्मक संकेत मिले हैं। विदेशी ग्राहकों की मांग में सुधार दर्ज किया गया, जिससे निर्यात आधारित सेवाओं को बल मिला। विभिन्न देशों से प्राप्त नए ऑर्डरों ने भारतीय कंपनियों को अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ाने का अवसर दिया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है, जो निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

सेवा क्षेत्र में गतिविधियों के विस्तार का प्रभाव रोजगार बाजार पर भी दिखाई दिया। कई कंपनियों ने बढ़ते कार्यभार को देखते हुए नए कर्मचारियों की भर्ती की। रोजगार सृजन की गति पिछले एक वर्ष के दौरान सबसे मजबूत स्तरों में से एक रही। हालांकि अधिकांश कंपनियों ने अपने मौजूदा कार्यबल को बनाए रखा, फिर भी नई भर्तियों में बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत देती है।

दूसरी ओर लागत संबंधी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। खाद्य सामग्री, ईंधन, गैस, श्रम और अन्य परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी है। हालांकि लागत में वृद्धि के बावजूद कंपनियां अपनी कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करने में सफल रही हैं। महंगाई के दबाव में कुछ नरमी आने से सेवा प्रदाताओं पर मूल्य बढ़ाने का दबाव भी पहले की तुलना में कम हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है और वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते रहते हैं, तो आने वाले महीनों में भी सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन मजबूत रह सकता है। कारोबारी संस्थानों का दृष्टिकोण फिलहाल आशावादी बना हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार आगे भी जारी रहेगा।

सेवा क्षेत्र की मजबूती का असर समग्र अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दिया है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के संयुक्त प्रदर्शन को दर्शाने वाला कंपोजिट पीएमआई भी मई में बेहतर स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था विकास के मजबूत पथ पर आगे बढ़ रही है।

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