October 21, 2026

भारतीय अर्थव्यवस्था का जलवा… एक्सपर्ट का दावा- अमीर देशों की बराबरी पर पहुंच रही GDP ग्रोथ

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नई दिल्ली।
भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए लगातार गुड न्यूज आ रही हैं. आईएमएफ (IMF) से लेकर वर्ल्ड बैंक *World Bank( तक ने Indian Economy का लोहा माना है. तमाम एजेंसियों ने भारत की जीडीपी ग्रोथ (GDP growth) के अनुमान को बढ़ाकर तमाम ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद देश की बढ़ती रफ्तार पर अपनी मोहर लगाई है. अब कोरियाई अर्थशास्त्री (Korean Economist) ने एक और खुशखबरी देते हुए कहा है कि भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी अमीर देशों के बराबर पहुंच रही है. उन्होंने आंकड़ों के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट के जरिए इसे समझाया है।


जीवन स्तर में तेजी से हो रहा सुधार

दक्षिण कोरियाई इकोनॉमिस्ट क्युंगहून किम (South Korean Economist Kyunghoon Kim) के अनुसार, भारत की आर्थिक प्रगति का आकलन सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि देश आज कितना गरीब या अमीर है, बल्कि इस आधार पर किया जाना चाहिए कि देश में जीवन स्तर कितनी तेजी से सुधर रहा है और यह कितनी तेजी से अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है. उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती प्रति व्यक्ति आय और गरीबी में आई भारी गिरावट सराहनीय है.

कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (KIIP) में भारत और दक्षिण एशिया टीम के प्रमुख क्युंगहून किम ने रविवार को कहा कि भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं के बारे में उनके पहले के आकलन पर ऐसी टिप्पणियां आई थीं, जिनमें सुझाव दिया गया था कि भारत अभी भी गरीब है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब एक्स) पर एक लंबे-चौड़े पोस्ट में लिखा, ‘अधिक उपयोगी प्रश्न यह है कि क्या जीवन स्तर तेजी से बढ़ रहा है और क्या भारत इस मामले में आगे बढ़ रहा है?’


‘प्रति व्यक्ति GDP में तेज इजाफा’

किम ने अपनी पोस्ट में आंकड़े शेयर करते हुए बताया है कि 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,702 डॉलर थी, या क्रय शक्ति समता (PPP) के लिए समायोजित करने पर यह 11,784 डॉलर थी. ऐतिहासिक तुलनाओं के लिए, उन्होंने 2021 की स्थिर पीपीपी प्राइस पर प्रति व्यक्ति जीडीपी का उपयोग किया, जो 2025 में 10,039 डॉलर थी.

किम ने बताया कि विश्व बैंक द्वारा भारत को 2007 तक निम्न-आय वाले देश के रूप में वर्गीकृत किया गया था. 1990 में, भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी निम्न-आय वाले देशों के औसत से केवल 15% अधिक थी. वहीं 2025 तक यह उस औसत से चार गुना से भी अधिक चुकी थी और मध्यम आय वाले देशों के औसत का 64% तक हो गई, जिसमें से अधिकांश वृद्धि पिछले सिर्फ एक दशक में हुई है. उन्होंने कहा कि भारत की तुलना मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं से करने पर भी सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, इस समूह में चीन और वियतनाम जैसे तेजी से बढ़ते देश शामिल हैं।


‘अमीर देशों के साथ अंतर कम कर रहा भारत’

किम के मुताबिक, भारत अमीर देशों के साथ आय के अंतर को कम करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है. उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत की प्रगति धीमी, लेकिन लगातार हो रही है. 1990 में, भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी उच्च आय वाले देशों के औसत का मात्र 6% थी, 2025 तक, यह हिस्सा बढ़कर 17% हो गया था।

हालांकि, अर्थशास्त्री ने इस सुधार के पीछे कई धनी देशों में धीमी आर्थिक ग्रोथ को भी कारण बताया. भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी भी वैश्विक औसत के लगभग आधे के करीब पहुंच रही है, जबकि 1990 में यह सिर्फ एक-पांचवें हिस्से के बराबर थी।


भारत की तारीफ में ये बोले किम

किम ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘कुल मिलाकर, भारत निम्न-आय वाले देशों से और आगे निकल रहा है, उच्च-आय वाले देशों के बराबर पहुंच रहा है और मध्यम-आय वाले औसत की ओर तेजी से प्रगति कर रहा है.’ उन्होंने इस धारणा को भी चुनौती दी कि विकासशील देश स्वतः ही धनी अर्थव्यवस्थाओं के बराबर पहुंच जाते हैं. उन्होंने कहा, ‘बराबरी होना स्वतः होने वाली बात नहीं है।

अर्थशास्त्री के मुताबिक, गरीबी में रहने वाले भारतीयों की संख्या में 627 मिलियन की कमी आई है. भारत की आर्थिक प्रगति के सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक गरीबी में कमी आना रहा है. 4.40 डॉलर प्रति दिन की गरीबी रेखा पर, भारत की गरीबी दर 2004 में 73% से घटकर 2023 में सिर्फ 14% हो गई. किम ने कहा कि भारत की लगभग 1.4 अरब आबादी को देखते हुए ये सुधार विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आगे लिखा कि, ‘मेरा निष्कर्ष वही है, भारत के सामने भले कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसकी आर्थिक ग्रोख, विशेष रूप से पिछले दशक में, और सकारात्मक मध्यम अवधि के विकास के दृष्टिकोण सराहनीय हैं. 1.4 अरब लोगों के देश के लिए यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है।

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