होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा आर्थिक कदम, पेट्रोल-डीजल निर्यात शुल्क में बदलाव से वैश्विक तेल बाजार पर असर की उम्मीद
इस निर्णय के बाद पेट्रोल पर निर्यात शुल्क घटकर 1.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है, जबकि डीजल पर यह 13.5 रुपये प्रति लीटर रहेगा। विमानन टरबाइन ईंधन पर 9.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लागू किया गया है। यह बदलाव विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के रूप में लागू होगा और इसके तहत रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे कर ढांचे में आंशिक सरलता देखने को मिलेगी।
सरकार का कहना है कि निर्यात शुल्क की समीक्षा हर पखवाड़े की जाती है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति स्थिति का आकलन शामिल होता है। पिछले संशोधन के बाद अब नई दरों की घोषणा मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखकर की गई है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर अनिश्चितता के चलते सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और किसी भी प्रकार का घरेलू संकट उत्पन्न न हो। इसी उद्देश्य से निर्यात नीति में समय-समय पर संशोधन किया जाता है ताकि घरेलू जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच संतुलन बना रहे।
इससे पहले भी इसी वर्ष मार्च में निर्यात शुल्क प्रणाली को लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य निर्यात प्रवाह को नियंत्रित करना और घरेलू खपत के लिए पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना था। मई में हुए पिछले संशोधन के बाद अब एक बार फिर नई दरों की घोषणा की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप मानी जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नीतिगत निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूत करते हैं और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। आने वाले समय में तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय हालात के आधार पर इस नीति में और बदलाव संभव हैं, क्योंकि सरकार हर पखवाड़े समीक्षा प्रक्रिया के जरिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखती है।
