अल्मोड़ा: पीएम और सीएम तक ने नहीं तोड़ी जो सदियों पुरानी परंपरा, वह बरेली DM ने तोड़ दी
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– जागेश्वर धाम की पवित्रता की अनदेखी स्वीकार नहीं
– जागेश्वर धाम के गर्भगृह में असलहा लेकर पहुंचा यूपी का डीएम

Weapons In The Temple : अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम में की पवित्रता को बरेली DM ने खंडित कर दिया। सदियों पुरानी परंपरा को जहां अत्यधिक खतरे के बीच भी पीएम और सीएम तक ने नहीं (कड़ी सुरक्षा के बावजूद कभी गर्भगृह के अंदर हथियार नहीं ले जाया गया) तोड़ा।
वहीं सोमवार को अपने पद के मद में चूर उत्तर प्रदेश के बरेली के डीएम अविनाश सिंह परंपरा को तोड़कर दनदनाते हुए अपने गनर के साथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर गए। दरअसल डीएम वहां नवग्रह पूजा कर रहे थे और उनका सुरक्षाकर्मी कार्बाइन जैसे असलहे के साथ गर्भगृह के भीतर मौजूद था। दरअसल जब उससे पुजारियों ने पूछा तो सुरक्षा कर्मी डीएम के सुरक्षा कारणों और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए गर्भगृह में प्रवेश कर गए।
पुजारियों ने इसे मंदिर की पवित्रता और धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए तुरंत विरोध दर्ज कराया। साथ ही इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखने को मिला। घटना के व्यापक विरोध के बाद मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। ज्ञात हो कि खुफिया एजेंसियों जागेश्वर धाम को देश के संवेदनशील स्थलों में शामिल किया गया है, जिसके चलते यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी जाती है। इसके बावजूद किसी डीएम की ऐसी हरकत सवाल तो खड़े करती ही है।
सवाल: गर्भगृह की पवित्रता पर उठे
मंदिर के पुजारियों का कहना है कि गर्भगृह किसी भी मंदिर का सबसे पवित्र स्थान होता है, जहां प्रवेश के सख्त नियम होते हैं. खासतौर पर हथियार जैसी चीजें गर्भग्रह में लेकर जाना पूरी तरह वर्जित माना जाता है. पुजारियों ने यह भी बताया कि उच्च पदस्थ नेताओं के दौरे के समय भी ऐसे नियमों का पालन किया जाता रहा है।

मंदिर के पुजारी नवीन चंद्र भट्ट, मनोज भट्ट और अन्य का कहना है कि गर्भगृह की पवित्रता सर्वोपरि है। उनके मुताबिक, अब तक देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री भी जब यहां दर्शन के लिए आए, तब उनकी कड़ी सुरक्षा के बावजूद कभी गर्भगृह के अंदर हथियार नहीं ले जाया गया। पुजारियों ने स्पष्ट किया कि भगवान जागेश्वर के गर्भगृह की मर्यादा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस घटना ने मंदिर की प्राचीन परंपराओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विरोध: पुजारियों ने किया
एक ओर जहां इस घटना के विरोध में कई पुजारी एकजुट हो गए और उन्होंने इसे धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया। पंडित नवीन चंद्र भट्ट सहित अन्य पुजारियों ने साफ कहा कि परंपराओं की अनदेखी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती और गर्भगृह की पवित्रता बनाए रखना किसी भी कीमत पर अनिवार्य है। किसी भी नेता के लिए ये नियम नहीं बदले जाएंगे।
वहीं इस संबंध में सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी के दौरे के दौरान सशस्त्र सुरक्षा देना सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है। हालांकि, यह दलील पुजारियों और स्थानीय लोगों को संतुष्ट नहीं कर पाई है। उन्होंने इस तर्क के बाद भी इस पर सख्त कार्यवाही की मांग की है।
सवाल जो उठता है
सुरक्षा एजेंसियों के जवाब पर ही जो सवाल सामने आकर खड़ा होता है, उसके अनुसार क्या डीएम साहब पीएम व सीएम से भी अधिक सशस्त्र सुरक्षा प्रोटोकॉल में आते हैं। क्योंकि जब पीएम सीएम ने तक अपनी सुरक्षा में सबसे अधिक खतरे के बावजूद मंदिर परंपरा को निभाया तो डीएम क्या उनसे भी बड़ा औहदा रखते है। या वे अपने पद के मद में इस कदर चूर हैं कि वे अपने सामने पीएम व सीएम पद तक को मामूली व खुद के पद से छोटा मानते हैं।
गौरतलब है कि पूर्व में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद गर्भगृह में किसी प्रकार का हथियार नहीं ले जाया गया था। ऐसे में इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।
दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी 2023 में जागेश्वर धाम आए थे। उनकी सुरक्षा को देखते हुए पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील किया गया था। बड़ी बात ये है कि उनकी सुरक्षा में तैनात एसपीजी भी मंदिर के गर्भगृह में असलहा लेकर नहीं गई थी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जागेश्वर बाबा से काफी लगाव है। वह हर साल यहां पूजा अर्चना के लिए आते हैं। उनके सुरक्षा कर्मी भी असलहे लेकर मंदिर के गर्भगृह में नहीं जाते हैं। असलहे वाले सुरक्षा कर्मियों को मंदिर प्रवेश द्वार पर खड़ा कर दिया जाता है।
बरेली, यूपी के DM अविनाश सिंह जागेश्वर धाम उत्तराखंड के गर्भगृह में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी के साथ चले गए। पुजारियों ने इसे मंदिर की पवित्रता और परंपरा के खिलाफ बताया है। वहीं ASI ने भी मंदिर में हथियार ले जाना नियमों के खिलाफ बताया है और जांच की बात कही है।@journorai pic.twitter.com/m8XrIkk7cO
— INDIA APRADH CONTROL NEWS (@IacHead) April 21, 2026
कुल मिलाकर घटना के बाद मंदिर परिसर में तनाव का माहौल बन गया। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ।
चेतावनी बोर्ड लगाया
इस घटना के बाद अब पुजारियों ने स्थल की देखरेख करने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से मंदिर परिसर के अंदर हथियार ले जाने पर रोक लगाने वाले स्पष्ट सूचनाएं लगाने का आग्रह किया है। इसके बाद, मंदिर परिसर के भीतर हथियार ले जाने पर प्रतिबंध लगाने वाला एक चेतावनी नोटिस लगा दिया गया है।
अब देखना ये है कि उत्तराखंड से इस संंबंध में कोई कार्रवाई की जाती है या उत्तरप्रदेश के सीएम योगी जो स्वयं जागेश्वर की मान्यताओं से भली भांति परिचित हैं, और स्वयं भी देवभूमि से जुड़े हैं वे इस पर कोई एक्शन लेते हैं?
कौन है? अविनाश सिंह, ऐसे समझें
अविनाश सिंह 2014 बैच के आईएएस अधिकारी है और मौजूदा समय में बरेली जिले के डीएम है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर रहने वाले अविनाश सिंह का जन्म 10 जून 1970 में हुआ था। शिक्षा में एमए किया है। अविनाश सिंह मौजूदा समय में बरेली के जिलाधिकारी के पद पर तैनात है। 2023 में पहली बार किसी जिले का प्रभार मिला। वह अंबेडकर नगर के डीएम बना। 2025 में तबादला बरेली हो गया, तब से वह यहीं हैं। इसके अलावा वह मिर्जापुर में मुख्य विकास अधिकार रह चुके हैं।
