September 6, 2026

बुध की कमजोरी से लेकर केतु के प्रभाव तक, गणेश चतुर्थी पर ये आसान उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत का रुख

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नई दिल्ली । भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा कर लोग सुख समृद्धि बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में इस पर्व का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है और विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय देव माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करने पर कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं में भगवान गणेश का संबंध बुध और केतु से भी जोड़ा जाता है। बुध को बुद्धि वाणी तर्क शिक्षा व्यापार और निर्णय क्षमता का कारक ग्रह माना जाता है। वहीं केतु को आध्यात्मिकता ज्ञान वैराग्य और जीवन में अचानक आने वाले बदलावों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार यदि कुंडली में बुध कमजोर हो या केतु का अशुभ प्रभाव महसूस हो रहा हो तो गणेश जी की आराधना को लाभकारी माना जाता है।

केतु के साथ भगवान गणेश का संबंध धार्मिक कथाओं से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काटने के बाद उन्हें हाथी का सिर प्रदान किया था। ज्योतिषीय प्रतीकवाद में केतु को बिना सिर वाले ग्रह के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में गणेश जी की उपासना को केतु से जुड़ी बाधाओं को शांत करने वाला उपाय माना गया है। जब व्यक्ति को बार बार भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़े काम अटकते रहें या बिना स्पष्ट कारण के परेशानियां बढ़ती महसूस हों तो गणेश आराधना करने की सलाह दी जाती है।

बुध ग्रह से जुड़ी मान्यताओं में भी गणेश पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का देवता माना जाता है और बुध ग्रह का संबंध भी बुद्धि वाणी तथा तर्क से है। इसलिए बुधवार के दिन गणपति की पूजा करना ज्योतिषीय उपायों में शामिल किया जाता है। पूजा के दौरान गणेश जी को हरी दूर्वा अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा में 21 दूर्वा अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। इसके साथ गणपति को मोदक या लड्डू का भोग लगाया जा सकता है।

बुधवार की सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश की विधि पूर्वक पूजा करें और श्रद्धा के साथ दूर्वा अर्पित करें। इस दौरान ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप किया जा सकता है। बुध ग्रह से संबंधित ज्योतिषीय मान्यता रखने वाले लोग ॐ बुं बुधाय नमः मंत्र का जाप भी करते हैं। हरी मूंग का दान और हरे रंग के वस्त्र धारण करना भी बुध से जुड़े पारंपरिक उपायों में बताया जाता है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की पूजा केवल ज्योतिषीय उपाय के तौर पर ही नहीं बल्कि श्रद्धा और सकारात्मकता के पर्व के रूप में भी की जाती है। मान्यता है कि विघ्नहर्ता की आराधना व्यक्ति को धैर्य विवेक और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देती है। हालांकि ज्योतिषीय उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचार नहीं माना जाता।

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