September 12, 2026

गणपति उत्सव सिर्फ मूर्ति स्थापना तक सीमित नहीं कहीं गौरी पूजन तो कहीं खास सजावट जानिए राज्यों के अनुसार गणेश चतुर्थी की अनोखी परंपराएं

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नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी का पर्व भारत में भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026 से शुरू होगा। गणपति स्थापना के साथ देशभर में कई दिनों तक पूजा अर्चना भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। हालांकि इस पर्व की खासियत सिर्फ इसकी भव्यता नहीं बल्कि अलग अलग राज्यों में इससे जुड़ी स्थानीय परंपराएं भी हैं। महाराष्ट्र से लेकर गोवा कर्नाटक तमिलनाडु और अन्य राज्यों तक गणेश उत्सव मनाने का तरीका काफी अलग दिखाई देता है।

महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का उत्सव सबसे ज्यादा लोकप्रिय और भव्य रूप में दिखाई देता है। यहां घरों के साथ सार्वजनिक पंडालों में भी गणपति की स्थापना की जाती है। कई स्थानों पर विशाल प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और पूरे उत्सव के दौरान विशेष पूजा आरती सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा भजन का आयोजन होता है। मुंबई और पुणे जैसे शहरों में गणेश उत्सव की रौनक देखते ही बनती है। परिवारों में गणपति को घर का सदस्य मानकर श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया जाता है।

गोवा में गणेश चतुर्थी को चवथ के नाम से जाना जाता है। यहां इस पर्व का स्वरूप काफी पारिवारिक और पारंपरिक होता है। गणपति स्थापना के साथ माटोली सजाने की खास परंपरा निभाई जाती है। माटोली में फल सब्जियां पत्तियां फूल और जंगल से मिलने वाली कई प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना भी माना जाता है। गणपति पूजा के दौरान मोदक के अलावा कई स्थानीय पकवान भी तैयार किए जाते हैं।

कर्नाटक में गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश के साथ गौरी पूजन की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई परिवारों में गौरी देवी का विशेष स्वागत किया जाता है और महिलाओं द्वारा पूजा अर्चना की जाती है। गणेश और गौरी की पूजा को परिवार की सुख समृद्धि और मंगल से जोड़कर देखा जाता है। घरों में सजावट के साथ पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

तमिलनाडु में गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान गणेश की पूजा में पारंपरिक दक्षिण भारतीय रीति रिवाजों की झलक दिखाई देती है। घरों और मंदिरों में गणपति की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा की जाती है। भगवान गणेश को अलग अलग प्रकार के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं और भक्त श्रद्धा के साथ मंत्र जाप तथा आरती करते हैं।

देश के अन्य हिस्सों में भी गणेश चतुर्थी स्थानीय संस्कृति के रंग में रंगी दिखाई देती है। कहीं बड़े सार्वजनिक आयोजन होते हैं तो कहीं परिवार के लोग घर में छोटी प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधि विधान से पूजा करते हैं। कई जगहों पर पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

गणेश चतुर्थी की यही विविधता भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाती है। पूजा की विधि और परंपराएं भले ही अलग हों लेकिन हर जगह भगवान गणेश से सुख शांति समृद्धि और विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। यही वजह है कि गणपति उत्सव धार्मिक आस्था के साथ साथ भारत की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का भी खूबसूरत उदाहरण बन जाता है।

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