आज धनतेरस पर बाजार जाने से पहले जान लें ये नियम, चाकू-कैंची से लेकर लोहे तक इन 7 चीजों की खरीदारी से बचें
धनतेरस पर खरीदारी करते समय सबसे पहले चाकू कैंची छुरी ब्लेड और सुई जैसी धारदार वस्तुओं से परहेज करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन नुकीली और धारदार चीजें खरीदने से घर में तनाव और विवाद बढ़ सकते हैं। इसलिए लोग इस शुभ अवसर पर ऐसी वस्तुओं की खरीदारी टालते हैं। दूसरी चीज लोहे से बनी वस्तुएं हैं। धार्मिक मान्यताओं में लोहे का संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है। इसलिए धनतेरस के दिन लोहे का सामान खरीदना शुभ नहीं माना जाता। इसके बजाय सोना चांदी तांबा और पीतल खरीदने की परंपरा अधिक प्रचलित है।
तीसरी चीज काले रंग का सामान है। धार्मिक मान्यताओं में काले रंग को कई शुभ अवसरों पर खरीदारी के लिहाज से उचित नहीं माना जाता। इसलिए धनतेरस पर काले रंग के कपड़े जूते या सजावटी सामान खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। चौथी चीज कांच और शीशे से बनी वस्तुएं हैं। मान्यता है कि कांच का संबंध राहु से होता है और इसके टूटने को शुभ नहीं माना जाता। इसी वजह से धनतेरस पर कांच के बर्तन और सजावटी सामान खरीदने से परहेज किया जाता है।
पांचवीं चीज तेल और घी है। दिवाली के दौरान घरों में दीपक जलाने के लिए तेल और घी की जरूरत होती है। हालांकि कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन इनकी खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए त्योहार से पहले ही इनका इंतजाम कर लेना बेहतर समझा जाता है। छठी चीज चमड़े से बनी वस्तुएं हैं। पर्स जूते बेल्ट और बैग जैसी चमड़े की चीजों को इस दिन खरीदने से बचने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चमड़े को पूजा-पाठ के लिए शुद्ध नहीं माना जाता। इसलिए शुभ अवसर पर ऐसी वस्तुओं की खरीदारी टालने की सलाह दी जाती है।
सातवीं और महत्वपूर्ण बात नए बर्तनों से जुड़ी है। धनतेरस पर बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है लेकिन मान्यता है कि नए बर्तन को खाली हाथ घर नहीं लाना चाहिए। उसमें थोड़ा चावल गेहूं धनिया मिठाई या पानी भरकर घर लाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि इससे परिवार में अन्न और धन की कमी नहीं होती तथा घर में बरकत बनी रहती है।
धनतेरस का पर्व केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह समृद्धि स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना का भी प्रतीक है। हालांकि इन सात चीजों को लेकर बताई गई बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए त्योहार मनाते समय अपनी श्रद्धा और आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर खरीदारी करना सबसे जरूरी है।
