August 29, 2026

इस साल जन्माष्टमी की तिथि को लेकर असमंजस …. पंचांग में देखें सही तारीख और मुहूर्त

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नई दिल्ली।
भगवान श्रीकृष्ण (Lord Sri Krishna) का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Krishna Paksha Ashtami) तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इस वजह से हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Shri Krishna Janmashtami) इस तिथि को ही मनाते हैं और कोशिश करते हैं कि उस दिन तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र भी हो. लेकिन ऐसा हर बार हो, यह संभव नहीं है. इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को है या फिर 5 सितंबर को? इस पर कन्फ्यूजन दूर करने के लिए पंचांग से जानते हैं जन्माष्टमी की सही तारीख और मुहूर्त के बारे में.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि 4 सितंबर को 2:25 एएम पर शुरू हो रही है और 5 सितंबर को 12:13 एएम तक विद्यमान रहेगी. उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो जन्माष्टमी की तिथि 4 सितंबर को पूरे दिन है, वहीं रोहिणी नक्षत्र में रात 11 बजकर 04 मिनट तक है।

भगवान श्रीकृष्ण जन्म मध्य रात्रि में हुआ था, तो 4 और 5 सितंबर की रात वह समय भी प्राप्त होगा. इस आधार पर इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सिंतबर शुक्रवार को मनाना उत्तम रहेगा. भाद्रपद में और भी कई व्रत-त्योहार हैं।


वज्र योग और मृगशिरा नक्षत्र में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के समय मृगशिरा नक्षत्र और वज्र योग होगा. बाल गोपाल भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मध्य रात्रि में मनाते हैं. उस दिन हर्षण योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 03:44 पी एम तक रहेगा. उसके बाद से वज्र योग प्रारंभ होगा, जो 5 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. वहीं रोहिणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 11:04 पी एम तक है, उसके बाद से मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ है।


जन्माष्टमी मुहूर्त 2026

इस साल जन्माष्टमी का मुहूर्त रात में 11:57 बजे से लेकर देर रात 12:43 बजे तक है. इसमें भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा और उत्सव मनाया जाएगा. जन्माष्टमी का ब्रह्म मुहूर्त 04:30 ए एम से 05:15 ए एम तक रहेगा. इस समय में स्नान करके व्रत का संकल्प कर लें. अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:55 बजे से लेकर दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा. अमृत काल रात में 08:03 पी एम से लेकर 09:33 पी एम तक है.


जन्माष्टमी व्रत का पारण समय

जो लोग जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे, वे देर रात 12:43 बजे के बाद पारण करके व्रत को पूरा करेंगे. जिनके यहां उदयाति​थि यानि सूर्योदय के बाद पारण होता है, वे 5 सितंबर को सूर्योदय बाद पारण करेंगे.

जन्माष्टमी पर राहुकाल कब है?
जन्माष्टमी के दिन राहुकल सुबह में 10 बजकर 45 मिनट पर प्रारंभ होगा और दोपहर में 12 बजकर 20 मिनट पर खत्म होगा. उस दिन आपको कोई शुभ काम करना है तो राहुकाल का ध्यान रखें. उसमें न करें।

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