भारतीय सिनेमा की पहली रामायण थी 'लंका दहन', महज 15 हजार में बनी फिल्म ने पहले सप्ताह में कमाए थे 30 हजार रुपये
1916 में बनी थी भारतीय सिनेमा की पहली रामायण
‘लंका दहन’ को भारतीय सिनेमा की पहली रामायण फिल्म माना जाता है। इसका निर्माण ऐसे समय में हुआ था, जब देश में फिल्म उद्योग शुरुआती दौर से गुजर रहा था। फिल्मों को बनाने और दर्शकों तक कहानी पहुंचाने के लिए तकनीकी साधन भी सीमित थे। मूक फिल्मों में कलाकारों को बिना बोले अपने चेहरे के भाव, शारीरिक गतिविधियों और अभिनय के जरिए कहानी समझानी पड़ती थी।
दादासाहेब फाल्के ने इस फिल्म के निर्देशन के जरिए रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को पर्दे पर उतारा। उस दौर में धार्मिक और पौराणिक कहानियों पर आधारित फिल्मों को दर्शकों के बीच विशेष रुचि के साथ देखा जाता था। ‘लंका दहन’ ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और भारतीय फिल्म इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई।
महज 15 हजार रुपये था फिल्म का बजट
आज के दौर में किसी बड़ी फिल्म के निर्माण में करोड़ों और कभी-कभी हजारों करोड़ रुपये तक खर्च किए जाते हैं। इसके मुकाबले ‘लंका दहन’ का निर्माण महज 15 हजार रुपये के बजट में किया गया था। साल 1916 के हिसाब से यह फिल्म निर्माण की एक महत्वपूर्ण परियोजना थी।
फिल्म की कमाई के आंकड़े भी उस समय के लिहाज से उल्लेखनीय माने जाते हैं। मुंबई के नाज टॉकीज में फिल्म ने पहले सप्ताह में करीब 30 हजार रुपये का कारोबार किया था। दादासाहेब फाल्के के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, शुरुआती 10 दिनों में इसका कलेक्शन लगभग 32 हजार से 35 हजार रुपये के बीच रहा था।
इस तरह फिल्म ने अपने शुरुआती प्रदर्शन में ही निर्माण लागत से अधिक कमाई की। इसे भारतीय सिनेमा की शुरुआती बॉक्स ऑफिस हिट फिल्मों में भी गिना जाता है। सीमित संसाधनों और कम बजट में बनी इस फिल्म की व्यावसायिक सफलता ने उस समय के फिल्म निर्माण के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत की थीं।
एक ही कलाकार ने निभाए थे राम और सीता के किरदार
‘लंका दहन’ की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक इसका कलाकारों का चयन था। फिल्म में भगवान राम और माता सीता दोनों की भूमिकाएं अभिनेता अण्णा सालुंके ने निभाई थीं। यानी पर्दे पर राम और सीता के रूप में नजर आने वाले कलाकार एक ही व्यक्ति थे।
इसके पीछे उस दौर की सामाजिक परिस्थितियां भी एक बड़ी वजह थीं। उस समय महिलाओं का फिल्मों में काम करना सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं माना जाता था। इसलिए महिला पात्रों के लिए कलाकार ढूंढना फिल्मकारों के सामने बड़ी चुनौती होती थी। इसी कारण शुरुआती भारतीय फिल्मों में कई बार पुरुष कलाकारों को ही महिलाओं की भूमिकाएं निभानी पड़ती थीं।
अण्णा सालुंके ने राम और सीता दोनों के किरदार निभाकर उस समय की फिल्म निर्माण संबंधी चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका यह अभिनय भारतीय सिनेमा के शुरुआती इतिहास की उल्लेखनीय घटनाओं में शामिल है।
मूक फिल्मों से आधुनिक रामायण तक का सफर
1916 की ‘लंका दहन’ और आज की आधुनिक रामायण फिल्मों के बीच तकनीक और प्रस्तुति के स्तर पर लंबा बदलाव आया है। उस दौर में बिना संवाद के कहानी दिखाई जाती थी, जबकि आज की फिल्मों में आधुनिक कैमरा तकनीक, विशेष प्रभाव और विस्तृत सेट का इस्तेमाल किया जाता है।
रणबीर कपूर की रामायण भी इसी पौराणिक कथा की आधुनिक सिनेमाई प्रस्तुति है। 5 नवंबर को रिलीज हुई इस फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता रही है। ऐसे समय में ‘लंका दहन’ का इतिहास याद करना भारतीय सिनेमा की उस शुरुआती यात्रा को समझने का अवसर देता है, जब महज 15 हजार रुपये में रामायण की कहानी बड़े पर्दे पर उतारी गई थी।
