November 5, 2026

ट्रंप की पार्टी की चुनावी हार के बाद कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 10 फीसदी टूटकर 93 डॉलर तक पहुंचा

0
4-1793867233
नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। चुनावी नतीजों से ईरान युद्ध जल्द समाप्त होने की उम्मीद मजबूत हुई है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा और ब्रेंट क्रूड एक दिन में करीब 10 फीसदी तक टूट गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 93.22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले दो महीने का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी कच्चा तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) भी 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया।

तेल की कीमतों में आई इस गिरावट को भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने पर भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ता है। इसका असर घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना फिलहाल ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका को कम करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम तय होने पर कई अन्य कारकों का भी प्रभाव रहता है।

अमेरिका में चुनावी नतीजों के बाद ईरान युद्ध और अमेरिका-इजरायल के संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान युद्ध और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर मतदाताओं में नाराजगी थी। उनके मुताबिक, इस असंतोष ने चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान पहुंचाया। दूसरी ओर, सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने संघर्ष समाप्त करने का वादा किया है। ईरान युद्ध अब नौवें महीने में पहुंच चुका है और इसके लंबे खिंचने से वैश्विक ऊर्जा बाजार लगातार दबाव में रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अक्टूबर में ईरान पर नए हमले करने की धमकी दी थी। उस समय संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका से ब्रेंट क्रूड की कीमत छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। बाजार को डर था कि संघर्ष बढ़ने पर मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, मिडटर्म चुनाव के दौरान ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ईरान पर हमले तेज करने की उनकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि युद्ध को लेकर मतदाताओं की नाराजगी से उनकी पार्टी को चुनावी नुकसान हुआ है। इस बयान और चुनावी नतीजों ने बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद पैदा की है।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी रहने के बावजूद फारस की खाड़ी से कच्चे तेल का निर्यात फिर बढ़ा है। मध्य पूर्व से आपूर्ति में आई इस बढ़ोतरी ने क्षेत्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बनाया है। हालांकि, कच्चे तेल के निर्यात में सुधार के बावजूद पेट्रोल और डीजल जैसे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति अब भी प्रभावित है। इसका मतलब है कि कच्चे तेल की कीमत घटने के बावजूद रिफाइंड ईंधनों के बाजार में चुनौतियां बनी हुई हैं।

ऊर्जा बाजार की एक अन्य चिंता अमेरिका में डीजल के भंडार को लेकर है। वहां कच्चे तेल का भंडार लगातार पांचवें सप्ताह घटा है। इसके साथ ही डीजल और अन्य डिस्टिलेट ईंधनों का स्टॉक 100 मिलियन बैरल से नीचे आ गया है। यह स्तर वर्ष 2003 के बाद सबसे कम बताया गया है। भंडार में लगातार कमी से पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है।

इसके अलावा रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के बढ़ते हमलों ने भी पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को प्रभावित किया है। इससे तैयार ईंधनों की कीमतों में तेजी का दबाव बना हुआ है। इस तरह एक तरफ कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, तो दूसरी तरफ रिफाइंड उत्पादों की आपूर्ति संबंधी समस्याएं कायम हैं। आने वाले समय में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक ईरान युद्ध की स्थिति, मध्य पूर्व से निर्यात और प्रमुख देशों के ईंधन भंडार पर निर्भर करेगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *