अब बैंक को भुगतान की जानकारी देना ही काफी, RBI ने सेवा निर्यात के रिपोर्टिंग नियमों में किया बड़ा बदलाव
आरबीआई ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के तहत विदेशी मुद्रा प्रबंधन वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात और आयात दूसरा संशोधन विनियम 2026 जारी किया है। ये नियम 1 अक्टूबर 2026 से पिछली तारीख से प्रभावी माने गए हैं। रिजर्व बैंक ने इस संशोधन के माध्यम से सेवा निर्यातकों के लिए ईडीएफ से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया है। इसका उद्देश्य रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को आसान बनाना और बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से विदेशी भुगतान की निगरानी को व्यवस्थित करना है।
इससे पहले सितंबर में अधिसूचित व्यवस्था के तहत सेवा निर्यातकों को उस महीने के समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर ईडीएफ जमा करना अनिवार्य था जिसमें इनवॉइस जारी किया गया था। इस फॉर्म के जरिए निर्यातक अपने अधिकृत डीलर बैंक को विदेश में दी गई सेवाओं और उनसे मिलने वाले संभावित भुगतान की जानकारी देते थे। बैंक इसी जानकारी के आधार पर रिजर्व बैंक के एक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम यानी ईडीपीएमएस में निर्यात लेनदेन दर्ज करते थे। इससे विदेशी ग्राहकों से मिलने वाली रकम की प्राप्ति पर नजर रखी जाती थी।
नए स्पष्टीकरण के तहत अब फ्रीलांसर और अन्य सेवा निर्यातकों के लिए यह प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो गई है। यदि कोई व्यक्ति किसी महीने के दौरान एक या उससे अधिक विदेशी ग्राहकों को सेवाएं देता है तो वह उन सभी निर्यातों के लिए एक ही ईडीएफ जमा कर सकता है। वहीं सॉफ्टवेयर के अलावा दूसरी सेवाओं का निर्यात करने वाले व्यक्ति भुगतान प्राप्त होने की तारीख पर या उससे पहले भी ईडीएफ जमा कर सकते हैं। इससे अलग-अलग ग्राहकों और सेवाओं के लिए बार-बार दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने की परेशानी कम होगी।
फेमा के तहत ईडीएफ एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें निर्यात की गई सेवाओं और विदेशी ग्राहकों से मिलने वाली संभावित रकम का विवरण दर्ज किया जाता है। आरबीआई के नए स्पष्टीकरण के बाद यदि फ्रीलांसर या स्वतंत्र पेशेवर अपने बैंक को भुगतान से जुड़ी जरूरी जानकारी दे देते हैं तो अलग से फॉर्म जमा करने की औपचारिकता पूरी मानी जाएगी।
2 नवंबर को अधिसूचित नवीनतम संशोधन में निवासी व्यक्ति की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है। आरबीआई ने निवासी व्यक्ति को भारत में रहने वाले वास्तविक व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया है। संशोधन में अनिवासी निर्यातकों को भी राहत दी गई है। यदि किसी सेवा के लिए प्राप्त होने वाला भुगतान 10 लाख रुपये से अधिक नहीं है तो ऐसी स्थिति में ईडीएफ स्वतः जमा माना जाएगा।
इसके अलावा संशोधित नियमों में सेवा आयात की रिपोर्टिंग को लेकर भी प्रावधान तय किए गए हैं। अधिकृत डीलर बैंकों को ईडीपीएमएस में सेवा आयात का विवरण दर्ज करना होगा। यह व्यवस्था उन मामलों में लागू होगी जहां आयातक निवासी व्यक्ति नहीं है और इनवॉइस या अनुबंध का मूल्य 10 लाख रुपये से अधिक है। बैंक को जरूरी जानकारी प्राप्त होने के पांच कार्य दिवसों के भीतर यह विवरण सिस्टम में दर्ज करना होगा। आरबीआई के इन बदलावों से सेवा निर्यात और आयात से जुड़े विदेशी मुद्रा लेनदेन की निगरानी के साथ-साथ पेशेवरों के लिए नियमों का पालन करना भी आसान हो सकता है।
