मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले, सूखे से प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के निर्देश
बारिश की कमी से प्रभावित जिलों में अलीराजपुर की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है। यहां सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा इंदौर उज्जैन बैतूल हरदा नर्मदापुरम रतलाम झाबुआ धार शाजापुर और पांढुर्ना सहित अन्य क्षेत्रों में भी बारिश के आंकड़ों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जा रहा है। कम वर्षा का असर खेती और जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि प्रभावित जिलों के किसानों को किस तरह की सहायता मिलेगी और किन क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा इसका अंतिम फैसला संबंधित आकलन के बाद स्पष्ट होगा।
कैबिनेट बैठक में आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ यानी EOW के लिए 345 करोड़ रुपये की स्वीकृति की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही कैंपा फंड के तहत 2050 करोड़ रुपये के प्लान को मंजूरी दी गई है। नर्मदा घाटी विकास विभाग की वर्ष 2019-20 से संचालित चार योजनाओं को जारी रखने का निर्णय लिया गया। इन योजनाओं के अंतर्गत कुल 3378 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। ये परियोजनाएं छिंदवाड़ा मुरैना सिवनी और सागर जिलों से संबंधित हैं। सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से कृषि क्षेत्र को पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सामाजिक न्याय विभाग की सात योजनाओं के लिए भी 351 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बैठक में नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार 201 प्रकरणों में 392 अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकारी व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। मंत्रियों को अपने अपने क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की निगरानी करने के लिए भी कहा गया है।
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस को लेकर भी कैबिनेट में तैयारियों पर चर्चा हुई। एक नवंबर से तीन दिनों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और मंत्रियों को कार्यक्रमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दीपावली के अवसर पर मिट्टी से बने उत्पादों और माटी कला को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने सेवा संकल्प अभियान के तहत किए गए कार्यों और किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा भी की। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में राहत की घोषणा कब होती है और सहायता का लाभ किस तरह पहुंचाया जाता है।
