October 27, 2026

रीवा में आधी रात जल सत्याग्रह पर प्रशासन की कार्रवाई, तालाब से बाहर निकाले गए प्रदर्शनकारी, न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में आंदोलन जारी

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रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना के खिलाफ जल सत्याग्रह कर रहे आप नेता प्रमोद शर्मा और आदिवासी प्रदर्शनकारियों को मंगलवार रात करीब एक बजे प्रशासनिक टीम ने तालाब से बाहर निकलवाया। इस दौरान मौके पर लालगांव पुलिस भी मौजूद रही। लगातार आंदोलन और अनशन के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रमोद शर्मा समेत चार लोगों को एंबुलेंस से संजय गांधी अस्पताल भेजा गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों को तालाब से बाहर निकालने के बावजूद आंदोलन खत्म होने के संकेत नहीं मिले हैं। ग्रामीण अब भी परियोजना को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को मौखिक आश्वासन दिया गया है कि अगले 10 दिनों तक रोझौही में प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी कोई गतिविधि नहीं होगी। हालांकि इस आश्वासन के संबंध में लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी बात को लेकर ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल मौखिक भरोसे से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जब तक परियोजना को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

जल सत्याग्रह में शामिल आप नेता प्रमोद शर्मा के साथ संदीप कोल रावेन्द्र कोल और बबली कोल की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। इससे पहले मदरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सीएचओ रविकांत साकेत ने प्रमोद शर्मा की स्वास्थ्य जांच की थी। जांच के दौरान उनका ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा हुआ पाया गया। लगातार अनशन और पानी में बैठकर विरोध करने के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजने का निर्णय लिया गया।

इस पूरे मामले में आदिवासी महिला विमला कोल की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया है। बताया गया है कि परियोजना के विरोध में जल सत्याग्रह कर रही विमला कोल की तबीयत बिगड़ गई थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनकी मांगों को गंभीरता से सुनने की अपील की है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी चिंताओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया।

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी इस आंदोलन के बीच रोझौही पहुंचे थे। उन्होंने आंदोलनकारी आदिवासियों और विमला कोल के परिजनों से मुलाकात की तथा परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। सिंघार ने प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामसभा की सहमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने विमला कोल की मौत की जांच की मांग भी की और प्रभावित ग्रामीणों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।

ग्रामीणों को आशंका है कि प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट से खेती की जमीन जलस्रोत जंगल और पर्यावरण प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि परियोजना के संभावित असर और भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। इससे पहले बोरिंग मशीन पहुंचने पर भी ग्रामीणों ने विरोध जताया था। रोझौही के अलावा सरई कला महुआ टोला मदरी और आसपास के गांवों के लोग भी परियोजना के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। फिलहाल प्रशासन के 10 दिन के मौखिक आश्वासन के बावजूद स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और परियोजना को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

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