भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस की आपत्ति, 21 साल से नई विकास योजना नहीं होने और कानूनी खामियों का उठाया मुद्दा
कांग्रेस ने प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 में पांच प्रमुख कानूनी खामियां होने का आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार, प्रारूप में वर्ष 2024 के मौजूदा भूमि उपयोग मानचित्र का राजपत्र में उल्लेख तो किया गया, लेकिन उसका विधिवत प्रकाशन और उस पर आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। कांग्रेस ने नगर विकास योजनाओं की अनंतिम सीमाएं दिखाने से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं होने का भी दावा किया है।
पार्टी ने आरक्षित भूमि के मालिकों के लिए मुआवजे या क्षतिपूर्ति की व्यवस्था, शहर के जल निकायों के जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण और वर्ष 2005 की योजना के हरित क्षेत्रों में किए गए बदलावों का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस के मुताबिक, भोपाल के 18 जल निकायों में से केवल बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को शामिल किया गया है, जबकि सभी जल निकायों के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रस्तावित योजना की परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि विकास का प्रारूप लोगों की जरूरतों के बजाय वाहनों की आवाजाही पर अधिक केंद्रित है। अभय दुबे के अनुसार, शहर में लगभग 54 प्रतिशत यात्राएं पैदल, साइकिल या ऑटो से होती हैं, लेकिन मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन के लिए स्पष्ट लक्ष्य, बस नेटवर्क, साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित क्षेत्रों का पर्याप्त प्रावधान नहीं है।
कांग्रेस ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी टीओडी के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में करीब 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र को विकास के लिए प्रस्तावित किया गया है, लेकिन घनत्व, फ्लोर एरिया रेशियो और किफायती आवास जैसे जरूरी प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं। इसी तरह, 51 किलोमीटर लंबे बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में 2,449 हेक्टेयर भूमि पर सघन विकास प्रस्तावित होने पर भी आपत्ति जताई गई है। कांग्रेस का कहना है कि इस क्षेत्र में मेट्रो या बस लेन जैसी परिवहन सुविधाएं नहीं हैं।
भूमि उपयोग और आवास के संबंध में भी पार्टी ने प्रारूप की आलोचना की है। कांग्रेस के दावे के अनुसार, आवासीय भूमि का हिस्सा निर्धारित मानकों से 5 से 7 प्रतिशत अधिक है, जबकि घनत्व 28 से 48 प्रतिशत कम है। इसी वजह से योजना का क्षेत्रफल 601 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,017 वर्ग किलोमीटर किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने करीब 4.8 लाख झुग्गीवासियों वाले शहर में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए पर्याप्त भूमि आरक्षित नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।
हरित क्षेत्र और जल आपूर्ति को लेकर कांग्रेस ने कहा कि प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र के लिए 10 से 12 वर्ग मीटर के मानक के मुकाबले प्रस्तावित योजना में लगभग 7 वर्ग मीटर का प्रावधान है। पार्टी ने पानी की उपलब्धता के अनुमान पर भी सवाल उठाए हैं। उसके अनुसार, योजना में जल जरूरतों का आकलन वर्ष 2031 तक किया गया है और 45 लाख की अनुमानित आबादी के लिए 209 एमएलडी पानी की कमी बताई गई है, लेकिन इसके स्रोत स्पष्ट नहीं हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भूमि चिन्हित नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है।
कांग्रेस ने शहर के विस्तार पर अनुमानित 59 हजार करोड़ रुपये के खर्च के लिए स्पष्ट वित्तीय योजना की मांग की है। पार्टी ने भूमि उपयोग मानचित्र की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने, संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित करने और सार्वजनिक परिवहन, किफायती आवास, हरित क्षेत्रों तथा जल प्रबंधन को लेकर ठोस प्रावधान शामिल करने की मांग की है। ये सभी आपत्तियां कांग्रेस की ओर से उठाई गई हैं; प्रस्तावित मास्टर प्लान पर अंतिम निर्णय और संबंधित विभागों का पक्ष इस विवरण में शामिल नहीं है।
