2017 के बाद कॉलेजों में नहीं चुने गए छात्र प्रतिनिधि, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब; सितंबर 2026 में चुनाव कराने का था कार्यक्रम
एडवोकेट आदिश टोंग्या की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। इसके कारण कई विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी हो गई लेकिन उन्हें अपने संस्थानों में छात्र प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिल सका। याचिका में इस स्थिति को विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि छात्रसंघ विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं सामने रखने और संस्थानों में अपनी आवाज पहुंचाने का मंच उपलब्ध कराते हैं।
याचिका में उच्च शिक्षा विभाग के 20 जुलाई 2026 के परिपत्र का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक विभाग ने सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का कार्यक्रम निर्धारित किया था। इसके साथ ही चुनाव की पूरी प्रक्रिया 10 कार्यदिवसों में संपन्न करने की योजना बनाई गई थी। इसके बावजूद चुनाव नहीं होने पर याचिका में सरकारी कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि जब चुनाव कराने के लिए कार्यक्रम तय किया गया था तो उस पर अमल क्यों नहीं हुआ।
मामले में हाईकोर्ट के 3 अगस्त 2026 के आदेश का भी हवाला दिया गया है। याचिका के अनुसार उस सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में छात्रसंघ चुनाव का प्रावधान शामिल किया जाएगा। इसके बाद अदालत के सामने प्रस्तुत कैलेंडर में सितंबर 2026 को चुनाव के लिए निर्धारित किया गया था। वर्तमान याचिका में इसी आदेश और घोषित कार्यक्रम के पालन का मुद्दा उठाया गया है। हाईकोर्ट ने अब उच्च शिक्षा विभाग से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है।
याचिकाकर्ता ने छात्रसंघ चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराने की मांग की है। याचिका में यूनिवर्सिटी ऑफ केरल बनाम काउंसिल ऑफ प्रिंसिपल्स ऑफ कॉलेजेस केरल एवं अन्य मामले का उल्लेख करते हुए छात्रसंघ चुनाव से जुड़े कानूनी पहलुओं की ओर भी अदालत का ध्यान दिलाया गया है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 19(1)(c) का हवाला देते हुए विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े अधिकारों का मुद्दा उठाया गया है।
जनहित याचिका में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश देने के साथ भविष्य में नियमित चुनाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिनव पी. धनोडकर अदालत में उपस्थित हुए। हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब राज्य सरकार को सितंबर 2026 के निर्धारित चुनाव कार्यक्रम पर की गई कार्रवाई और चुनाव नहीं होने के कारणों के बारे में जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
