अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान
यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब अमेरिका ने पिछले सप्ताह रूस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी। इसके बदले रूस ने वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में डीजल की आपूर्ति करने पर सहमति जताई। इस समझौते को लेकर यूक्रेन ने नाराजगी जाहिर की है। जेलेंस्की का मानना है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाली अतिरिक्त राहत युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता को मजबूत कर सकती है।
यूक्रेन ने इस समझौते को कमजोर फैसला बताते हुए चिंता जताई है कि रूस को ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई युद्ध जारी रखने में मदद कर सकती है। जेलेंस्की का कहना है कि रूस को आर्थिक राहत मिलने से यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई लंबी खिंच सकती है। इस समझौते की यूरोप में भी आलोचना हुई है। यूक्रेन का रुख है कि रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले उसकी सैन्य क्षमता और युद्ध से जुड़े संसाधनों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।
इस बीच, ट्रंप ने एक साक्षात्कार में जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना आसान नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि जेलेंस्की समझौता करने की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तव में इसके लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति के बड़े प्रशंसक नहीं हैं और उनके नेतृत्व में यूक्रेन को भारी नुकसान हुआ है।
ट्रंप ने रूस और यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं की तुलना करते हुए कहा कि रूस एक बड़ा देश है और उसके पास बड़ी संख्या में सैनिक उपलब्ध हैं, जबकि यूक्रेन के पास इतनी बड़ी जनशक्ति नहीं है। उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों की भी आलोचना की। उनका तर्क है कि डीजल उत्पादन से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के बीच मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं, जब ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर अस्थायी संघर्षविराम की कोशिशें भी प्रभावित हुई हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस की ओर से उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहने के कारण वह एकतरफा तौर पर अपनी कार्रवाई रोककर नहीं रख सकता। कीव के अनुसार, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की किसी भी व्यवस्था में दोनों पक्षों की ओर से समान प्रतिबद्धता जरूरी है।
इस घटनाक्रम से अमेरिका और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक मतभेद और गहरे होने की आशंका बढ़ी है। एक ओर ट्रंप प्रशासन ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकने पर जोर दे रहा है, वहीं यूक्रेन अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करने को तैयार नहीं दिख रहा। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनती है या नहीं, इसका असर युद्ध की आगे की दिशा और रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों पर पड़ सकता है।
