October 16, 2026

प्रदर्शन से कौन-कौन सांसद रहा गायब, राहुल गांधी की नजर में आए सभी सांसद, सहयोगियों ने मिलकर दिखाई एकजुटता

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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मुहिम को मजबूत बनाने के लिए इस बार संगठन और रणनीति दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में बढ़ती भागीदारी के पीछे राहुल गांधी की निगरानी और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल को अहम वजह माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने न केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले सांसदों की मौजूदगी पर नजर रखी बल्कि गैरहाजिर रहने वाले नेताओं की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही उन्होंने सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं से सीधे संपर्क कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी अपनी कोर टीम के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे। इस टीम में प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा केसी वेणुगोपाल और अन्य रणनीतिक सहयोगी शामिल थे। बैठकों में प्रदर्शन की रूपरेखा तय करने के साथ सांसदों और पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। शुरुआती प्रदर्शनों में कुछ कांग्रेस सांसदों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद राहुल गांधी ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से प्रदर्शन में शामिल होने वाले और गैरहाजिर रहने वाले सांसदों की सूची तैयार करने को कहा। पार्टी के एक सूत्र के मुताबिक जब सांसदों को पता चला कि राहुल गांधी खुद उनकी मौजूदगी पर नजर रख रहे हैं तो प्रदर्शन में उनकी भागीदारी बढ़ने लगी।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि आंदोलन में भागीदारी को लेकर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस की कोशिश थी कि सांसद केवल सोशल मीडिया पर बयान देने तक सीमित न रहें बल्कि जमीन पर उतरकर भी अपनी भूमिका निभाएं। प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए। दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय को कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए खोला गया। हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के नेताओं ने कार्यकर्ताओं के आने और उनके ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क कर उन्हें जल्द दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया।

इस पूरी रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा INDIA गठबंधन के सहयोगियों को साथ लेकर चलना था। राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और माकपा के एमए बेबी समेत कई नेताओं से संपर्क किया। इससे पहले कुछ प्रदर्शनों के दौरान सहयोगी दलों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने और कांग्रेस नेताओं को अधिक प्रमुखता दिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इन मतभेदों को दूर करने के लिए कांग्रेस ने इस बार छोटे दलों को भी महत्व देने पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के दौरान राहुल गांधी जिस खुले ट्रक से नेतृत्व कर रहे थे उसमें सहयोगी दलों और छात्र संगठनों के नेताओं को भी जगह दी गई। इससे यह संदेश देने की कोशिश हुई कि आंदोलन किसी एक पार्टी का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि विपक्ष की साझा मुहिम है।

राहुल गांधी की पहल का असर गठबंधन के भीतर समन्वय में भी दिखाई दिया। समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बार कांग्रेस के साथ बेहतर तालमेल की बात कही। कांग्रेस ने राजनीतिक दलों के साथ छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया ताकि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर व्यापक समर्थन जुटाया जा सके।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति तथा INDIA गठबंधन की बैठकों में चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस विषय पर एकजुट होकर आवाज उठाने पर जोर दिया। कांग्रेस का मानना है कि सांसदों की सक्रिय भागीदारी सहयोगियों के साथ बेहतर समन्वय और नागरिक समाज की हिस्सेदारी से आंदोलन को व्यापक बनाया जा सकता है। हालांकि इस रणनीति का वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में स्पष्ट होगा लेकिन फिलहाल राहुल गांधी की सक्रियता ने विपक्षी एकजुटता और संगठनात्मक अनुशासन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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