October 6, 2026

रूस में प्लेग की आशंका से बढ़ी चिंता, लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद 200 लोग निगरानी में, अमेरिका ने मांगी जानकारी

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नई दिल्ली:
रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की महिला लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा की संदिग्ध मौत के बाद प्लेग को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लैब में जांच के दौरान जिंदा बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटने से वह संक्रमित हुई थीं। हालांकि, रूस की स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनादजोर ने इस दावे को खारिज किया है। संस्था के मुताबिक महिला की मौत प्लेग से नहीं, बल्कि अज्ञात निमोनिया से हुई है। जांच किए गए नमूनों में कोई घातक रोगाणु भी नहीं मिला। इसके बावजूद पड़ोसी राज्य बुरियाटिया के प्रमुख एलेक्सी त्सिदेनोव ने मौत की वजह प्लेग होने की आशंका जताई है। वहीं, रोस्पोट्रेबनादजोर के पूर्व प्रमुख गेनेडी ओनिश्चेंको ने कहा कि यह प्लेग नहीं है और ठंड के कारण संक्रमण का प्रसार संभव नहीं है।

मंगोलिया की सीमा के पास शेलेखोव कस्बे के जिस अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया था, वहां के पूरे स्टाफ को क्वारंटीन कर दिया गया है। स्वतंत्र मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार करीब 200 लोग निगरानी में हैं। अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती रोक दी गई है और कुछ अन्य अस्पताल भी बंद किए गए हैं। लॉकडाउन की चर्चाओं के बीच गवर्नर इगोर कोब्जेव ने लोगों से शांत रहने की अपील की है। एहतियात के तौर पर सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। नजदीकी एल्युमिनियम प्लांट में मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। मेयर मैक्सिम मोदिन के अनुसार, पिछले 10 दिनों में संस्थान के किसी अन्य कर्मचारी में संक्रमण नहीं मिला है। हालांकि, संपर्क में आए लोगों में कोविड-19 और राइनोवायरस के दो-दो मामले मिले हैं।

मामले पर अमेरिका भी नजर बनाए हुए है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह संभावित निमोनिक प्लेग से हुई मौत की स्थिति की सीडीसी के साथ निगरानी कर रहा है। अमेरिका ने रूस से मामले की सटीक जानकारी साझा करने की अपील की है। करीब 95 शोधकर्ताओं वाला यह संस्थान साइबेरिया और सुदूर-पूर्वी क्षेत्रों में अति-जोखिम वाले संक्रमणों की रोकथाम से जुड़ा प्रमुख केंद्र है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि वह इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की लैब वर्कर की मौत के मामले पर करीबी नजर रख रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चिंता की कोई बात है।

रूस में प्लेग फैलने की आशंका के बीच कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने अपनी सीमाओं पर स्वास्थ्य नियंत्रण कड़े कर दिए हैं। किर्गिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी सीमा चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा है। सीमा पार करने वाले यात्रियों, वाहनों और सामान की कड़ाई से निगरानी की जा रही है। उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य प्राधिकरण ने रूस और विश्व स्वास्थ्य संगठन के डेटा के आधार पर निगरानी बढ़ाई है, ताकि संभावित संक्रमण को देश में आने से रोका जा सके। कजाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी स्थिति पर लगातार नजर रखने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार संक्रमण फैलने का जोखिम बेहद कम है, लेकिन सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग और जांच की जा रही है।

इस घटना ने अतीत में प्रयोगशालाओं से संक्रमण फैलने की घटनाओं की याद भी ताजा कर दी है। 1967 में जर्मनी में मारबर्ग वायरस पर शोध के दौरान वैज्ञानिक संक्रमित हुए थे और 31 लोग इसकी चपेट में आए थे, जिनमें सात की मौत हुई थी। 1977 में रूस और चीन में इन्फ्लूएंजा के प्रसार को लेकर भी लैब से जुड़े संक्रमण की चर्चा हुई थी। 1978 में ब्रिटेन में बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की लैब से एयर डक्ट के जरिए चेचक फैलने की घटना में जेनेट पार्कर की मौत हुई थी। 2019 में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से कोरोना वायरस के संभावित लीक का दावा भी सामने आया था, जिस पर वैश्विक स्तर पर मतभेद जारी हैं।

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