October 6, 2026

उत्तराखंड में 20 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट, विशेष TET के लिए शासन ने मंगाया यूपी का आदेश

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Teachers
  • आदेश के बाद से बना हुआ है असमंजस

उत्तराखंड में करीब 20 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा हैं। विशेष टीईटी से संबंधित मुख्यमंत्री के निर्देश और प्रमुख सचिव के आदेश के बाद भी विभाग की ओर से अभी कोई रास्ता नहीं निकाला जा सका है। शिक्षा सचिव ज्योति यादव के मुताबिक मामले में यूपी का विशेष टीईटी आदेश मंगा लिया गया है। जिसका परीक्षण किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा एक से आठवीं तक के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया है। 31 अगस्त 2028 तक टीईटी न कर पाने वाले शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जाएंगी। वहीं, इस तरह के शिक्षकों की इस दौरान पदोन्नति भी नहीं हो पाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक करीब 12 हजार शिक्षक प्रारंभिक शिक्षा में हैं। जो टीईटी नहीं हैं, जबकि माध्यमिक शिक्षा में इस तरह के शिक्षकों की संख्या करीब सात से आठ हजार है।

शासन के अगले कदम पर टिकी हैं हजारों शिक्षकों की निगाहें
हालांकि इसमें करीब पांच हजार शिक्षकों की आयु 55 साल या फिर इससे अधिक है, लेकिन इन्हें पदोन्नति के लिए टीईटी करना अनिवार्य है। उत्तराखंड में शिक्षक टीईटी से मुक्त रखने या फिर यूपी की तर्ज पर विशेष टीईटी कराने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में शिक्षकों के मुख्यमंत्री से मिलने के बाद सीएम ने प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिसके बाद से हजारों शिक्षकों की निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी है।

शिक्षा सचिव ज्योति यादव के अनुसार शिक्षकों का कहना है कि इस प्रकरण में जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। यूपी के विशेष टीईटी के आदेश का परीक्षण किया जा रहा है, वहां इस मामले में इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल है। इस पर क्या आदेश आता है इसे देखने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा का कहना है कि यूपी की तर्ज पर विशेष टीईटी के लिए मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन इस मामले में अब तक कुछ नहीं हुआ, यूपी में विशेष टीईटी को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट का फैसला आ चुका है।

इधर, फर्जी प्रमाणपत्र से बने तीन सहायक अध्यापकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त:

वहीं एक अन्य मामले में शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर प्राथमिक शिक्षक के पद पर तैनात हुए तीन सहायक अध्यापकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई कर तीनों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। अब शिक्षा विभाग ने तीनों के खिलाफ पुलिस को भी तहरीर दी है, जिस पर पुलिस जांच के बाद तीनों शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

ऐसे समझें फर्जी प्रमाणपत्र मामला
दरअसल अल्मोड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय ने 7 नवंबर 2025 को सहायक अध्यापक (प्राथमिक) के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भैंसियाछाना ब्लॉक के तीन अभ्यर्थियों को 27 जनवरी 2026 को विभिन्न विद्यालयों में नियुक्ति दे दी गई।

प्रमाण पत्र फर्जी
इनमें कुनखेत नवीन के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में भूपेंद्र कुमार, बौड़ा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में अंजना ग्वासिकोटी और बूढ़ाधौर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में प्रियांशु चंद्र नियुक्त किए गए थे। प्राथमिक शिक्षक पद के लिए तीनों अभ्यर्थियों ने आवेदन के साथ यूटेट (Uttarakhand Teacher Eligibility Test) प्रथम वर्ष 2024 के प्रमाणपत्र संलग्न कराए और इन प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की शिकायत पर विभाग ने शिक्षकों के दस्तावेजों को जांच के लिए उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर भेजा। जांच में यूटेट प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर विभाग को इसकी रिपोर्ट सौंपी।

फर्जीवाड़ा: सामने आया
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर ने मामले की जांच कर 6 जुलाई 2026 को जांच रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार तीनों अभ्यर्थियों ने जो यूटेट का प्रमाणपत्र लगाया था, उसने दर्शाए गए अनुक्रमांक को परिषद की ओर से कभी भी जारी नहीं किया गया। परिषद के मूल टेबुलेशन रजिस्टर में भी तीनों अभ्यर्थियों का कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। वहीं प्रमाणपत्र और अंकपत्र पर दर्ज क्यूआर कोड भी जांच में फर्जी पाए गए। इसके बाद विभागीय जांच समिति ने 14 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल करने का आरोप सिद्ध हुआ। इसके बाद शिक्षा विभाग ने तीनों आरोपी शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की।

त्यागपत्र भेजकर किया बचने का प्रयास
विभाग की ओर से शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद तीनों शिक्षक अपने बचाव में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। उन्होंने पारिवारिक परिस्थितियों और बीमारी का बहाना बनाकर त्यागपत्र भेजकर उसे स्वीकार करने का अनुरोध कर बचने का प्रयास किया। वहीं अधिकारियों ने गंभीर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों मामले में जांच प्रक्रिया चलने के कारण त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया।

अल्मोड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), डा. रवि मेहता का कहना है कि तीनों शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच रिपोर्ट में प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। दोष सिद्ध होने के बाद तीनों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं विधिक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों और पुलिस को भी तहरीर दे दी गई है।

अल्मोड़ा के कोतवाल योगेश उपाध्याय के अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से तीन शिक्षकों के खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी प्राप्त करने के मामले में तहरीर प्राप्त हुई है। पुलिस द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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