बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान
इस पूरे मामले की शुरुआत CBI भोपाल की FIR से हुई थी। इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत जांच शुरू की। CBI की FIR में रुचि ग्लोबल लिमिटेड के साथ उमेश शाहरा साकेत बरोडिया आशुतोष मिश्रा और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के नाम दर्ज किए गए थे। इसके बाद ED ने बैंकिंग लेनदेन और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।
ED की जांच के अनुसार रुचि ग्लोबल ने पंजाब नेशनल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं हासिल की थीं। इनमें लेटर ऑफ क्रेडिट यानी LC भी शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि इन बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल संबंधित सहयोगी संस्थाओं के पक्ष में कृषि उत्पाद खरीदने के नाम पर किया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली लॉरी रिसीट का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से बिल डिस्काउंट कराए गए और रकम संबंधित संस्थाओं के खातों में पहुंची। ED का दावा है कि इसके बाद रकम को कई खातों के जरिए घुमाया गया और महज एक से तीन दिन के भीतर फिर रुचि ग्लोबल के खातों में वापस पहुंचा दिया गया। एजेंसी ने इसे बैंक से हासिल क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग और रकम को लेयर करने की प्रक्रिया बताया है।
मामले में ED ने दिसंबर 2025 में भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने 23 दिसंबर को PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी ली थी। इस दौरान 23.50 लाख रुपए की कथित बेहिसाब नकदी जब्त की गई थी। कुछ बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में ED ने करीब 5.13 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों के संबंध में प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया।
ED के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में रुचि ग्लोबल से जुड़े उमेश शाहरा की पत्नी नीता शाहरा के नाम की जमीन भी शामिल है। एजेंसी का आरोप है कि बैंक से प्राप्त कथित रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में किया गया। हालांकि संपत्ति कुर्की और आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।
CBI की FIR में बैंक समूह की शिकायत के आधार पर कुल 188.35 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया था। वहीं ED की मौजूदा जांच में करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग पर फोकस है। चालान दाखिल होने के बाद अब 21 आरोपियों और संस्थाओं को जारी नोटिस के आधार पर कोर्ट में आगे की कार्यवाही होगी। ED ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच जारी है और लेनदेन से जुड़ी अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।
