UP: आठ बार विधायक रहे सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन, अखिलेश-योगी ने जताया शोक
सपा के मीडिया प्रभारी सुशील पांडे के मुताबिक, राम गोविंद चौधरी को करीब दो सप्ताह पहले SGPGI में भर्ती कराया गया था। इससे पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनकी हार्ट सर्जरी हुई थी। मैक्स अस्पताल में भी उनका लंबे समय तक इलाज चला था और डायलिसिस की गई थी।
आठ बार विधायक, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे
राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वह आठ बार विधायक चुने गए और मार्च 2017 से मार्च 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने मुलायम सिंह यादव की सरकार में दो अलग-अलग कार्यकाल में मंत्री के तौर पर काम किया। इसके अलावा 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री रहे।
उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत कई नेताओं ने शोक जताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौधरी के निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष के निधन पर दुख जताया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि राम गोविंद चौधरी के निधन से प्रदेश ने एक अनुभवी राजनेता और समर्पित जनप्रतिनिधि खो दिया है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1953 को बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक गांव में हुआ था। तीन भाइयों में सबसे बड़े चौधरी ने शुरुआती पढ़ाई गांव और सिकंदरपुर में की। इसके बाद उन्होंने बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज में BSc में दाखिला लिया।
छात्र समस्याओं को लेकर आंदोलनों में सक्रिय रहने के कारण उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने श्री मुरली मनोहर टाउन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में दाखिला लिया और यहीं से छात्र राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ी।
1972 में वह टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए, जबकि 1974 में छात्रसंघ के अध्यक्ष बने।
आपातकाल में जेल गए, जेपी आंदोलन से जुड़े
आपातकाल के दौरान राम गोविंद चौधरी लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए चलाए गए आंदोलन में सक्रिय रहे। वह जिले की ‘छात्र युवा वाहिनी’ के सह-संयोजक भी बने। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और बलिया तथा बाराबंकी की जेलों में रखा गया।
उन्होंने ‘संपूर्ण क्रांति’ के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ काम किया। इसके साथ ही वह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के करीबी सहयोगियों में भी शामिल रहे।
मुलायम और अखिलेश सरकार में मंत्री रहे
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन समाजवादी आंदोलन से दशकों तक जुड़ा रहा। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर में कमजोर और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने दो अलग-अलग कार्यकाल में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2012 से 2017 के बीच अखिलेश यादव सरकार में भी वह मंत्री रहे। वर्ष 2017 में उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया और मार्च 2022 तक उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली।
राम गोविंद चौधरी के परिवार में उनका बेटा और अन्य परिजन हैं। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया।
