ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित रही है। इस दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि भारत ने इन प्राथमिकताओं के जरिए ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया है।
उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया और करीब 30 शहरों में सदस्य देशों की टीमों का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन देने के लिए सभी सदस्य देशों का आभार भी जताया।
ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने को प्रधानमंत्री मोदी ने संगठन के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में 20 वर्ष की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत का संकेत देती है। इसी तरह ब्रिक्स भी अपने विकास के ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं और सामर्थ्य को नई दिशा देने की जरूरत होती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए आगे बढ़ते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ब्रिक्स की सोच किसी के खिलाफ खड़े होने की नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अगले 20 वर्षों के लिए नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अब ब्रिक्स के भीतर बनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने का समय है। इसके लिए संगठन को अपनी कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देना होगा।
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यक्षता बदलने से संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने ब्रिक्स में निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत ट्रोइका के माध्यम से ब्रिक्स की विभिन्न पहलों और उनके परिणामों का फॉलोअप किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग अध्यक्षताओं के बीच निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और पहले से तय पहलों के क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।
18वें शिखर सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह ब्रिक्स के मौजूदा स्वरूप, भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं और संगठन के अगले 20 वर्षों की दिशा पर अपना दृष्टिकोण रखा। उनके संबोधन में सहयोग, निरंतरता, कार्यान्वयन और वैश्विक स्तर पर ठोस परिणाम हासिल करने पर विशेष जोर रहा।
