आशा भोसले जयंती पर याद आए उनके अनसुने किस्से, गायिकी के साथ खाना बनाने में भी माहिर थीं ताई, लता दीदी पर भी चिल्लाई थीं
आशा भोसले का जन्म संगीत से जुड़े परिवार में हुआ था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर मशहूर थिएटर कलाकार और शास्त्रीय गायक थे। आशा का बचपन सुरों और संगीत के माहौल में बीता। जब वह महज 9 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार आर्थिक संकट में घिर गया और जीवनयापन के लिए पुणे और कोल्हापुर से होते हुए परिवार मुंबई आ गया।
कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने के लिए आशा भोसले ने गायकी की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने महज 10 साल की उम्र में मराठी फिल्म ‘मझा बल’ के लिए ‘चला चला नव बाला’ गाना गाया था। साल 1943 में रिकॉर्ड किया गया यह गीत उनके शुरुआती फिल्मी सफर का अहम पड़ाव बना। आगे चलकर उन्होंने हिंदी सहित कई भाषाओं में हजारों गीत गाए और लोकगीत, गजल, शास्त्रीय संगीत, कव्वाली और बॉलीवुड गीतों में अपनी अलग पहचान बनाई।
करियर के शुरुआती दौर में आशा भोसले को काफी संघर्ष करना पड़ा। उस समय गीता दत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेशकर का दबदबा था। कई बार जब दूसरी गायिकाएं किसी गाने को छोड़ देती थीं, तब वह आशा को मिलता था। इसी वजह से 1950 के दशक में उन्होंने वैम्प्स और बैड गर्ल्स के किरदारों के लिए कई गाने गाए। इस दौर में यह अफवाह भी रही कि आशा अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर को प्रतिद्वंद्वी मानती थीं।
हालांकि दोनों बहनों के बीच रिश्ता बेहद खास था। एक इंटरव्यू में आशा ने बताया था कि फिल्म ‘बसंत बहार’ के गीत ‘कर गया रे मुझपे जादू’ की रिकॉर्डिंग के दौरान वह लता दीदी पर चिल्ला पड़ी थीं। दोनों इस राग भैरवी आधारित गीत की कई बार रिहर्सल कर चुकी थीं। रिकॉर्डिंग के दिन आशा को एक और गाना रिकॉर्ड करने जाना था। करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद उन्होंने रिहर्सल रूम में जाकर लता से कहा कि अब चलिए, वह और इंतजार नहीं कर सकतीं। इसके बाद लता ने मुस्कुराकर उनका गुस्सा शांत किया और दोनों रिकॉर्डिंग के लिए चली गईं।
आशा भोसले की जिंदगी में निजी उतार-चढ़ाव भी रहे। 16 साल की उम्र में उन्होंने गणपत राव भोसले से शादी की। शादी के बाद उन्हें परिवार से दूरियां भी झेलनी पड़ीं। बाद में 1960 में वह अपने बच्चों के साथ मां के घर लौट आईं। इसके बाद उन्होंने फिर से गायकी शुरू की। आगे चलकर उनकी मुलाकात राहुल देव बर्मन यानी आरडी बर्मन से हुई और दोनों ने 1980 में शादी कर ली। आरडी बर्मन ने 4 जनवरी 1994 को कार्डियक अरेस्ट के कारण अंतिम सांस ली।
गायकी के अलावा आशा भोसले को खाना बनाने का भी बेहद शौक था। वह स्वादिष्ट व्यंजन बनाने में माहिर थीं और उनके हाथ का कढ़ाई गोश्त और बिरयानी बेहद पसंद किए जाते थे। उन्होंने खुद बताया था कि अगर वह गायिका नहीं बनतीं तो अच्छी कुक बनकर पैसे कमातीं। उन्होंने विदेश में अपने नाम से रेस्तरां भी खोले थे। यही वजह है कि आशा ताई की पहचान केवल सुरों की महारानी के रूप में नहीं, बल्कि बेहतरीन पाक कला के लिए भी रही।
आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हुआ। उनका आखिरी गाना ‘द शैडोई लाइट’ था, जिसे उन्होंने गोरिल्लाज के साथ रिकॉर्ड किया था और यह 27 फरवरी 2026 को रिलीज हुआ था। उनकी आवाज, संघर्ष और जिंदगी से जुड़े किस्से आज भी उन्हें संगीत प्रेमियों के बीच हमेशा खास बनाए रखते हैं।
