ब्रेन एजिंग को धीमा करने का असरदार फॉर्मूला! उम्र बढ़ने पर भी दिमाग को जवान रखने में मदद कर सकता है संगीत
उम्र के साथ मस्तिष्क में धीरे-धीरे संरचनात्मक बदलाव होते हैं। कई लोगों में न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन बनाने और सूचनाओं को तेजी से प्रोसेस करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। मेडिकल रिपोर्ट्स में बताया गया है कि 40 वर्ष की आयु के बाद मस्तिष्क में होने वाले कुछ बदलाव अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को ब्रेन एट्रोफी या ब्रेन श्रिंकेज कहा जाता है। हालांकि हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा नहीं होता। व्यक्ति की जीवनशैली शिक्षा तनाव का स्तर सामाजिक सक्रियता और शारीरिक स्वास्थ्य जैसे कई कारक दिमाग पर उम्र के प्रभाव को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र से ही खानपान और जीवनशैली को बेहतर बनाने पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित एक्सरसाइज अच्छी नींद संतुलित भोजन और मानसिक रूप से सक्रिय रहने की आदत ब्रेन हेल्थ को बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसके साथ ही संगीत से जुड़ी गतिविधियां दिमाग के लिए खासतौर पर उपयोगी हो सकती हैं। किसी संगीत वाद्य यंत्र को सीखते समय दिमाग के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं और यही इसे एक तरह का फुल ब्रेन वर्कआउट बनाता है।
जब कोई व्यक्ति पियानो गिटार तबला वायलिन या अन्य वाद्य यंत्र बजाना सीखता है तो हाथों और अंगुलियों की गतिविधि के लिए मोटर कॉर्टेक्स सक्रिय होता है। स्वर और ताल को पहचानने के लिए ऑडिटरी सिस्टम काम करता है जबकि याददाश्त और एकाग्रता से जुड़े हिस्सों को भी लगातार सक्रिय रहना पड़ता है। संगीत के दौरान भावनात्मक प्रतिक्रिया और रचनात्मकता भी दिमाग की गतिविधियों का हिस्सा बनती है। यही कारण है कि संगीत प्रशिक्षण को मानसिक लचीलापन बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल किया जाता है।
अध्ययनों के अनुसार उम्र बढ़ने के बावजूद मस्तिष्क में नई तंत्रिका कड़ियां बनाने की क्षमता बनी रह सकती है। ऐसे में लगातार नई चीजें सीखना और दिमाग को चुनौती देने वाली गतिविधियों में शामिल होना उपयोगी हो सकता है। संगीत सीखना इस दिशा में एक रोचक विकल्प है क्योंकि इसमें सुनना समझना याद रखना हाथों की गतिविधियों को नियंत्रित करना और भावनात्मक रूप से जुड़ना एक साथ शामिल होता है।
बढ़ती उम्र के साथ दिमाग की कोशिकाओं के बीच संचार की गति धीमी पड़ सकती है और स्मृति ध्यान तथा निर्णय क्षमता से जुड़े हिस्सों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ अध्ययनों में उम्र के साथ ग्रे मैटर और व्हाइट मैटर में भी कमी की बात सामने आई है। फिर भी स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक सक्रियता इन बदलावों की गति को प्रभावित कर सकती है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव भी स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए भी संगीत योग ध्यान और सामाजिक जुड़ाव जैसी गतिविधियां ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं।
कुल मिलाकर बढ़ती उम्र को दिमाग की कमजोरी का अंतिम संकेत मानने की जरूरत नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद संतुलित खानपान मानसिक व्यायाम और संगीत जैसी नई चीजें सीखने की आदत दिमाग को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। उम्र चाहे जो भी हो दिमाग को चुनौती देना और लगातार कुछ नया सीखते रहना मानसिक सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
