September 7, 2026

रीवा के संजय गांधी अस्पताल में अर्चना की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए

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रीवा: के संजय गांधी अस्पताल में मरीज के इलाज और देखरेख को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। सतना निवासी अर्चना गुप्ता के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ दिनों बाद अर्चना की हालत अचानक बिगड़ गई और उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई।

जानकारी के मुताबिक, अर्चना गुप्ता 30 अगस्त को स्कूटी हादसे के बाद संजय गांधी अस्पताल में भर्ती हुई थीं। परिजनों का दावा है कि भर्ती के समय वह बातचीत कर रही थीं और उनकी हालत सामान्य थी। परिवार के अनुसार, शुरुआती दिनों के बाद उनकी तबीयत अचानक खराब होने लगी। इसके बाद मरीज की स्थिति को लेकर परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज और देखरेख में कथित लापरवाही के कारण अर्चना के शरीर में कीड़े पड़ने जैसी स्थिति बन गई। परिवार का कहना है कि मरीज की हालत देखकर वे उसे बेहतर इलाज के लिए किसी दूसरे अस्पताल में ले जाना चाहते थे, लेकिन उनके अनुसार डॉक्टरों ने मरीज को रेफर करने की अनुमति नहीं दी।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब परिजन मरीज की स्थिति का वीडियो बनाने के लिए आईसीयू पहुंचे। परिवार का आरोप है कि वहां मौजूद एक डॉक्टर ने उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। इसके बाद अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति बनी और परिजनों ने हंगामा करते हुए जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

फिलहाल अर्चना गुप्ता को संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू नंबर दो में भर्ती बताया जा रहा है। उनकी बेटी नैंसी गुप्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान हुई घटनाओं की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

संजय गांधी अस्पताल में हाल के दिनों में सामने आए अन्य मामलों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पिछले दो सप्ताह के दौरान कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया था। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए थे और मामले में अस्पताल के डॉक्टरों तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी।

इसके बाद अस्पताल में एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने का मामला भी सामने आया था। इस घटना को लेकर परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इसी अवधि में एक युवक ने आरोप लगाया था कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचने पर उसे कथित तौर पर एंटी रेबीज के बजाय एंटी वेनम इंजेक्शन लगा दिया गया।

हालांकि अर्चना गुप्ता के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। प्रबंधन के अनुसार मरीज का इलाज चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रख रही है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इलाज में लापरवाही हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है। ऐसे में अर्चना गुप्ता के मामले में जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और किसी की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

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