गंगा उफनीं तो डूबे 84 घाट, आगरा में चारपाई बनी सहारा… यूपी में बारिश-बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
उधर मेरठ और बाराबंकी में भी भारी बारिश के बीच मकान गिरने की घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में दो बच्चों समेत तीन लोगों के घायल होने की जानकारी है। महोबा में लगातार बारिश के कारण कच्चे मकानों पर खतरा बढ़ गया है। कुड़ार गांव में एक कच्चा मकान देखते ही देखते ढह गया। बताया गया कि मकान कुछ ही सेकंड में जमींदोज हो गया और पास से गुजर रहा एक युवक बाल-बाल बच गया।
वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। शहर के सभी 84 घाट पानी में डूब गए हैं और घाटों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। मणिकर्णिका घाट का शवदाह गृह भी जलमग्न होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई जगह लोग कमर तक पानी के बीच से गुजरते नजर आए।
ललितपुर में गोविंद सागर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद शहजाद नदी का जलस्तर बढ़ गया। छोटे पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। रामपुर में भी बाढ़ से घिरे भैया नगला गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। पुल टूटने के बाद ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जोखिम उठाने की मजबूरी बनी हुई है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब घटने लगा है लेकिन पानी उतरने के बाद कीचड़ और कचरे ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासन सफाई अभियान में जुटा है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का असर बना रह सकता है। 6 से 8 सितंबर के बीच कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद बारिश कराने वाला सिस्टम कमजोर पड़ने का अनुमान है। हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की बारिश और बौछारों का सिलसिला इसके बाद भी जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने राहत और बचाव के साथ जलभराव वाले इलाकों में आवागमन और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
