August 30, 2026

रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी

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नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती नफरत पूर्वाग्रह हिंसा और सामाजिक विभाजन के बीच न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित यूनिवर्सल वननेस कार्यक्रम ने इंसानियत और आपसी एकता का मजबूत संदेश दिया। कार्यक्रम में यहूदी ईसाई और मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित विभिन्न देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और लोगों से धार्मिक तथा सांस्कृतिक सीमाओं से ऊपर उठकर संवाद करुणा और सम्मान को बढ़ावा देने की अपील की। इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और कई देशों के धार्मिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद मानवता सभी को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है।

वर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलीजियस लीडर्स के संस्थापक महासचिव बाबा जैन ने 30 देशों के प्रमुख धर्मों से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया कॉल टू एक्शन पेश किया। उन्होंने कहा कि धर्म के भीतर लोगों को जोड़ने और उपचार तथा मेल-मिलाप की ताकत मौजूद है लेकिन इतिहास में कई बार धर्म का इस्तेमाल लोगों को बांटने और हिंसा को उचित ठहराने के लिए भी किया गया है। उन्होंने धार्मिक नेताओं से अपने समुदायों के शब्दों शिक्षाओं संस्थाओं और परंपराओं की समीक्षा करने का आह्वान किया ताकि किसी भी प्रकार की नफरत या हिंसा को धार्मिक आधार न मिल सके।

बाबा जैन ने कहा कि धार्मिक समुदायों को नफरत अपमान अमानवीय व्यवहार और हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि गहरी धार्मिक आस्था और दूसरे विश्वासों के प्रति सम्मान एक साथ कायम रह सकते हैं। उन्होंने धार्मिक नेताओं से संकट आने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही अलग समुदायों के बीच मजबूत रिश्ते बनाने की अपील की। युवाओं को भी धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से बाहर एक दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया गया। उनका मानना था कि जब लोग एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानने लगते हैं तो नफरत के लिए जगह कम होती जाती है।

इमाम शरीफ ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि इसमें शामिल लोग यहां से लौटने के बाद अपने व्यवहार और समाज में क्या बदलाव लाते हैं। उन्होंने एकता को एकरूपता से अलग बताते हुए कहा कि लोगों को एक दूसरे से जुड़े रहने के लिए एक जैसा बनने की जरूरत नहीं है। अलग-अलग धार्मिक विश्वासों के बावजूद सम्मान और संवाद कायम रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तकनीकी प्रगति के बावजूद इंसान के भीतर मौजूद नफरत पूर्वाग्रह अहंकार और समूहों में बंटने की प्रवृत्ति समाप्त नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि आज नफरत सीमाओं के पार और हमारी स्क्रीन के माध्यम से पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रही है। ऐसे समय में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ इंसानियत के सामने मौजूद चुनौतियों को समझना जरूरी है। रेवरेंड थॉर्न ने भी लोगों से डर और नफरत के बजाय एक दूसरे को सुनने समझने और साथ आने का रास्ता चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि पद धर्म राजनीति और देशों की सीमाओं से पहले सभी लोग इंसान हैं।

रब्बी ब्लुमेंथल ने यहूदी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर इंसान में ईश्वरीय अंश मौजूद है और प्रत्येक व्यक्ति सम्मान तथा प्रेम का हकदार है। उन्होंने समाज में बढ़ते अकेलेपन को भी कई समस्याओं की एक बड़ी वजह बताया और लोगों से जुड़ाव प्रेम तथा सम्मान के रिश्ते मजबूत करने की अपील की।

कार्यक्रम में रक्षा बंधन और राखी बांधने की परंपरा को विशेष रूप से देखभाल सुरक्षा और आपसी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। लोगों को संदेश दिया गया कि भाई बहन के रिश्ते तक सीमित इस भावना को पड़ोसियों अजनबियों और अलग-अलग धार्मिक समुदायों तक भी बढ़ाया जा सकता है। इस तरह राखी को एक ऐसे मानवीय बंधन के रूप में पेश किया गया जो सुरक्षा और जिम्मेदारी की भावना के जरिए समाज में विश्वास और एकता को मजबूत कर सकता है।

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